लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में निजामुद्धीन मरकज में हुई जमात के बाद जिले भर में भी शासन के आदेश पर बाहर से आने वालों की चेकिंग शुरू कराई गई। मदरसों की भी चेकिंग कर बाहर से आने वालों की तलाश की गई लेकिन इस चेकिंग की पोल उस समय खुल गई जब आसाम रोड पुलिस चौकी पर देर रात दो कार सवारों को पुलिस ने रोक लिया।

उनमे से एक युवक पश्चिम बंगाल का निवासी था और शहर में ही पिछले आठ सालों से रह रहा है। हालांकि स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसको छोड़ दिया गया। इन दिनों लॉकडाउन को लेकर जिले के सभी बार्डर सील कर दिए गए हैं। शुक्रवार रात दस बजे आसाम रोड पुलिस चौकी से गुजर रही एक कार को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोक लिया।

जानकारी करने पर पता चला कि उक्त लोग कार से लखनऊ बिना परमीशन के जा रहे हैं। इसके अलावा उनमे से एक युवक पश्चिमबंगाल का निवासी है और शहर के एक मदरसा संचालक के भाई के यहां वर्तमान में रह रहा है जबकि दूसरा युवक मोहल्ला पकड़िया का ही निवासी है। इस पर पुलिस और स्वास्थ्य टीम ने एसडीएम और सीओ सिटी को सूचना दी। जिसके बाद उसके बारे में गहन छानबीन कराई गई।

छानबीन में तस्दीक होने के बाद उन लोगों को वापस कर दिया गया। बता दें कि गुरूवार को ही सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी ने फोर्स संग मदरसों और अन्य जगहों की चेकिंग की थी। उस वक्त तक इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। न ही एलआईयू को इसकी खबर है। ऐसे में पुलिस,एलआईयू और प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठना लाजिमी है। सीओ सिटी प्रवीन मलिक ने बताया कि मदरसों की चेकिंग के दौरान केवल एक मदरसे पर कर्नाटक का एक युवक मिला था। इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

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