नवीन श्रीवास्तव
गाजीपुर यानी गाधिपुरी की धरती की गोद में ऐसे तमाम लाल पले बढ़े जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान किया। आज यानी एक जुलाई को ऐसे ही देश के सपूत और गाजीपुर व प्राचीन गाधिपुरी के गौरव वीर अब्दुल हमीद की जयंती है। उन्हें याद करने का दिन है। पाकिस्तानी हमले को ध्वस्त करने वाले वीर अब्दुल हमीद को आज पूरा देश सलाम करता है। आइये हम आप और हमारी नई पीढ़ी अपने इस सपूत के बारे में जानें ताकि जब देश की बात चले तो हमारा सिर दुश्मनों के सामने गर्व से तन सके।                                                                     
पाकिस्तान सेना के पैटन टैंक को गन माउनटेड से अब्दुल हामिद ने उड़ा दिया था                                               कश्मीर पर कब्जा करने के उद्देश्य से आ रही पाकिस्तान की सेना को रोकने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद मसऊदी (अब्‍दुल हामिद) की आज जयंती है। अपने शौर्य की वजह से इतिहास के पन्नों पर हमेशा के लिए अपना नाम लिखा गए अब्दुल हामिद को आज भी देश याद करता है। एक वीर सैनिक ने जिस तरह का शौर्य दिखाया, उसका जितना भी बखान किया जाए, उतना कम है। नौजवान सैनिक ने पाकिस्तान की सेना को आगे हिलने नहीं दिया, पाकिस्तान के सैकड़ों सैनिकों को मारकर खुद शहीद हो गया । 8 सितंबर 1965 को पाकिस्‍तान ने खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव में हुए जबरदस्‍त हमले में  रणनीति के साथ में मुकाबला करने जा रहा था। पाकिस्तान की सेना के साथ में पैटन टैंक भी थे। वहीं भारतीय जवानों के पास उनसे मुकाबले के लिए थ्री नॉट थ्री रायफल और एलएमजी ही थीं। इसके अलावा सेना के पास में गन माउनटेड जीप थी, जिससे अब्दुल हामिद चला रहे थे।
यूपी के गाजीपुर यानी गाधिपुरी में जन्मे थे अब्दुल हामिद
वीर अब्दुल हमीद का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर गाधिपुरी जिले में हुआ था। यहां के धामूपुर गांव में उनका जन्म 1 जुलाई 1933 को एक साधारण परिवार में हुआ था। अब्दुल हामिद के पिता दर्जी थे और माता गृहणी थी। परिवार की रोजीरोटी का सहारा होने के कारण शुरुआत में उन्होंने भी यही काम किया था। हमेशा ही सेना में जाने की चेष्टा रखने वाले अब्दुल हामिद 27 दिसंबर 1954 को सेना में भर्ती हुए। अब्दुल हामिद भारतीय सेना के ग्रेनेडियर रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कुछ समय के बाद उनकी तैनाती 4 ग्रेनेडियर बटालियन में कर दी गई। अब्दुल हामिद ने अपनी इस बटालियन के साथ आगरा, अमृतसर, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, नेफा और रामगढ़ में सेवाएं दीं। अब्दुल हामिद चीन के साथ हुए युद्ध में भी भारतीय सेना का हिस्सा थे और उस दौरान वे 7वीं इंफेंट्री ब्रिगेड का हिस्सा थे। बता दें, इस ब्रिगेड ने ब्रिगेडियर जॉन दलवी के नेतृत्व में नमका-छू के युद्ध में चीन की सेना से लोहा लिया था।
पाकिस्तान की 30 हजार सेना इससे थी प्रशिक्षित
भारत पर कब्जा करने की नियत से पाकिस्तान से एक बड़ी चाल 1965 में चली थी। पाकिस्तान सेना पैटन टैंकों के साथ में भारत पर आक्रमण करने की तैयारी कर रही थी। पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने के लिए 30 हजार सैनिकों को गोरिल्ला युद्ध के लिए भी प्रशिक्षित किया था। इस तरह से पाकिस्तान भारत से मुकाबला पूरी रणनीति के साथ में करना चाहता था। हालांकि अब्दुल हामिद ने अकेले अपने ही दम पर 1965 में खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव में पाकिस्‍तान से हुए युद्ध में उसके सात पैटन टैंकों को उड़ा दिया था। बता दें अमेरिका में तैयार किए गए इन टैंकों को अजेय समझा जाता था। पाकिस्‍तान सेना की तरफ से शामिल इन टैंकों के आगे भारतीय सेना बेहद कमजोर थी। पाकिस्तान से मुकाबला करने के लिए अब्‍दुल हामिद ने अपनी गन माउंटेड जीप से ही एक-एक करके सात टैंकों पर सटीक निशाना लगाकर उखाड़ दिया। बता दें, पाकिस्तान सेना ने अब्दुल हामिद को मारने के लिए उनकी जीप पर कई हमले किए। इसके बाद भी वह नहीं हारे और हामिद हिम्मत के साथ में लगे रहे। उनके साथ के सभी साथी इस हमले में शहीद हो गए थे।
अदम्‍य साहस के लिए परवीर चक्र से सम्मानित
अपने अचूक निशाने से अपनी पॉजीशन बदलकर हमला करने वाले अब्दुल हामिद ने बेहतर रणनीति से मुकाबला किया। वे एक के बाद एक करके पैटन टैंकों की कब्र खोदते चले गए। हालांकि 9 सितंबर को लड़ाई के दौरान ही एक पाकिस्तान के पैटन टैंक ने अब्दुल हामिद की जीप पर निशाना बनाकर जोरदार हमला किया। इसकी वजह से अब्दुल हामिद गंभीर रूप से घायल हो गए और 10 सितंबर को उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिली। देश की खातिर प्राण गंवाने वाले अब्दुल हामिद को अदम्‍य साहस और बलिदान के लिए उन्‍हें 16 सितंबर 1965 को सर्वोच्‍च वीरता पुरस्‍कार परमवीर चक्र दिया गया। जिस समय वह शहीद हुए, तब वे 4 ग्रेनेडियर के सिपाही थे। ऐसा कहा जाता है कि अमेरिका में निर्मित पाकिस्‍तान के पैटन टैंकों की अमेरिका की दोबारा समीक्षा करनी पड़ी थी। ऐसा कहा जाता था कि टैंकों के सामने गन माउंटेड का कोई मुकाबला नहीं हो सकता, लेकिन अब्दुल हामिद ने उसे गलत साबित कर दिया।

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