Pranab Sangamaप्रणब मुखर्जी अब भी भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष पद पर तैनात हैं, ऐसे में उनपर लाभ के पद पर होने का मामला बनता है।पीए संगमा ने राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि पूर्व वित्त मंत्री अब भी लाभ के पद पर हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में प्रणब को चुनौती दे रहे बीजेपी समर्थित उम्मीदवार संगमा ने कहा है कि प्रणब मुखर्जी भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष हैं।

संगमा का दावा है कि यह लाभ का पद है इसलिए वे राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य हैं और उनका नामांकन रद्द होना चाहिए। राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी बनाए गए राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को अपने वकील सतपाल जैन की ओर से भेजी गई शिकायत में मांग की गई है कि लाभ के पद के कानून के तहत प्रणब मुखर्जी का नामांकन रद्द किया जाए। जनता पार्टी के सुब्रमण्यम स्वामी ने भी संगमा का समर्थन करते हुए प्रणब का नामांकन रद्द करने की मांग की है।
यह साफ नहीं है कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान लाभ का पद है या नहीं। अगर यह लाभ का पद है तो सवाल उठता है कि प्रणब मुखर्जी को कितना वेतन, भत्ता वगैरह मिलता है। सवाल यह भी है कि क्या वित्त मंत्री पदेन भारतीय सांख्यिकी संस्थान का अध्यक्ष होता है? गौरतलब है 19 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं, जिसका नतीजा 23 जुलाई को आएगा।

गौरतलब है कि 4 जुलाई तक राष्ट्रपति पद के लिए नाम वापस लिया जा सकता है। जब इस बाबत पवन कुमार बंसल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम लोग इसका जवाब देंगे। लाभ के पद को लेकर विवाद से कांग्रेस का पुराना नाता रहा है। 2006 में लाभ के पद के ही मुद्दे पर सोनिया गांधी को लोकसभा से इस्तीफा देना पड़ा था।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पीए संगमा ने इस पद के लिए यूपीए के प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी के खिलाफ लाभ के पद पर रहते हुए नामांकन पत्र दाखिल करने की शिकायत दर्ज कराई है। संगमा ने राज्यसभा सचिवालय से की गई शिकायत में प्रणब का नामांकन खारिज करने की अपील की है।

संगमा के प्रतिनिधि और बीजेपी के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने प्रणब की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि प्रणब अभी भी भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता में अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। वे लाभ के पद पर रहते हुए कैसे राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन कर सकते है। बीजेपी नेता अनंत कुमार ने प्रणब मुखर्जी पर उम्मीदवारी के अयोग्य रहने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर प्रणब से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मुखर्जी ने कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से 20 जून को ही इस्तीफा दे दिया था। ये सम्मान के तौर पर दिया गया पद है और प्रणब को इसके लिए कोई भुगतान नहीं होता था। प्रणब ने संस्थान की केवल सेरेमनी ही अटैंड की थीं।

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