लखनऊ: कृषि कानूनों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के जीआईसी मैदान में जारी किसान महापंचायत के बीच प्रदर्शनकारी किसानों को भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी का साथ मिला है। भले ही केंद्र सरकार और पार्टी कृषि कानूनों की वापसी को नकार रहे हैं, मगर भाजपा सांसद वरुण गांधी किसानों के पक्ष में आज आवाज उठाते दिखे। किसान महापंचायत के इतर रविवार को बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने किसानों का दर्द समझने की अपील की है और कहा है कि वे अपने ही खून हैं और हमें उनका दर्द समझना होगा।
पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर कहा, ‘मुजफ्फरनगर में आज प्रदर्शन के लिए लाखों किसान जुटे हैं। वो हमारा ही खून हैं। हमें उनके साथ फिर से सम्मानजनक तरीके से जुड़ने की जरूरत है। उनका दर्द समझें, उनका नजरिया देखें और जमीन तक पहुंचने के लिए उनके साथ काम करें।’ वरुण ने इसके साथ ही एक वीडियो भी ट्वीट किया है, जो किसान महापंचायत का लग रहा है।
वरुण गांधी के इस ट्वीट को भाजपा के ही एक और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी रीट्वीट किया है। वरुण का यह बयान इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी कृषि कानूनों का पूरजोर समर्थन कर रही है। एक ओर जहां बीजेपी और मोदी सरकार कृषि कानूनों को डिफेंड कर रही है, वहीं किसान संगठन इसका विरोध कर रहे हैं और काला कानून बताकर इसकी वापसी की मांग पर टिके हैं। वरुण गांधी के ट्वीट से यह स्पष्ट हो गया है कि उनका स्टैंड किसानों के हित में ही है।

बता दें कि मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान पंचायत में देशभर से सैकड़ों किसानों का सैलाब इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंचा है। इसमें महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल हुई हैं। महापंचायत के मद्देनजर सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे-चप्पे पर पुलिसबल तैनात हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं। इस बीच मंच से ही किसान नेता राकेश टिकैत ने हुंकार भरी है और कहा कि जब तक कानूनों की वापसी नहीं होती, तब तक किसानों की भी घर वापसी नहीं होगी।
माना जा रहा है कि महापंचायत में अगले साल यूपी और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए भी रणनीति बन सकती है। इस महापंचायत में देशभर के 300 से ज्यादा सक्रिय संगठन शामिल हुए हैं। महापंचायत के मंच पर राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव सहित कई अन्य किसान नेता मौजूद हैं।

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