locust destroy crops of farmers in north india
पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश करने वाले टिड्डियों के दल का इस समय का हमला इस समय पूरे उत्तर भारत में चल रहा है। इस समय उत्तर प्रदेश में भी इसका खतरा बढ़ गया है। बरसात की वजह से इनकी संख्या देश में लाखों और करोड़ो में पहुंच गई है। यहीं नहीं, लगातार प्रजनन होने की वजह से इनकी संख्या में इजाफा ही हो रहा है। यूपी में ही लगभग हर जिले में इनका खतरा पहुंच गया है। टिड्डियों के लगातार बढ़ते हमले से किसानों को बहुत ही परेशानी हो रही है। किसानों की फसल को एक ही झटके में टिड्डियां चट जा रही है। इस तरह से कोरोनाकाल में किसानों के लिए आफत के रूप में टिड्डी का दल बनकर आया है। इस समय टिड्डी दल के हमले से पूरा उत्तर भारत प्रदेश परेशान है। टिड्डियों के दल ने खेतों के साथ ही साथ रिहायशी इलाके में भी प्रवेश कर दिया है।
लखनऊ, बाराबंकी सहित कई जिलों में पहुंचा टिड्डी दल, कई इलाकों में आतंक
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण का काल इस समय चल रहा है। इसके अलावा उमस भरी गर्मी भी जारी है। इसी बीच में लखनऊवासियों के लिए एक मुसीबत और आ गई है और वह है टिड्डी दल का हमला। जी हां, आज लखनऊ शहर में टिड्डी दल ने भी अपना कहर बरपाया। करीब छह किलोमीटर लम्बा टिड्डी दल उन्नाव और सीतापुर के रास्ते लखनऊ में घुसा। यहां पर डालीगंज, निशातगंज, कल्याणपुर, मड़ियांव और विकास नगर सहित कई जगह पर आतंक रहा। यहां पर करीब आधे एक घंटे तक लखनऊ में आतंक मचाने के बाद यह दल आगे हवा के साथ बढ़ गया और बाराबंकी पहुंचा। जहां टिड्डियों ने खेतों पर आक्रमण कर दिया। किसान खेतों में थाली बजाकर बचाव करने में जुट गए। आज दोपहर में टिड्डी का दल लखनऊ शहर में देखा गया, इससे लोग परेशान हो गए। आबादी वाले इलाके में टिड्डी दल का हमला होने से यहां के जनमानस को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
यहां पर पहले मचा चुका है आतंक
टिड्डी का दल इस समय उत्तर प्रदेश में घूम रहा है और हवा के साथ में अरबों की संख्या में बढ़ने वाली टिड्डियां किसानों की फसल को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा रही है। टिड्डी दल इससे पहले शनिवार को हरदोई के रास्ते सीतापुर, बहराइच और श्रावस्ती में तांडव मचाया। सीतापुर के पिसावां से मछरेहटा, फिर सिधौली, बिसवां, रामपुर मथुरा व रेउसा में इसका आतंक रहा। सीतापुर में आतंक मचाने के बाद दल ने बहराइच जिले में प्रवेश करके किसानों की फसल पर हमला किया। वैसे, जिन इलाकों में यह दल पहुंचा वहां के किसान पहले से ही अलर्ट थे।
टिड्डी के दलों को खेत से भगाने के लिए लोगों ने पहले खेत में पहुंचकर तेज ध्वनि से थाली बजाई और कृषि विभाग ने भी इन्हें भगाने का पूरा प्रयास किया। बहराइच के महसी तहसील के तेजवापुर होते हुए टिड्डी दल जिला मुख्यालय पहुंचा। टिड्डियों का दल इस समय काफी नुकसान कर रहा है, इससे किसानों में दल को लेकर काफी दहशत बनी हुई है। एक साथ पहुंचे टिड्डी दल ने फसलों व पेड़ों पर बैठकर नुकसान पहुंचाया। ऐसी सूचना मिल रही है कि बलरामपुर जिले में टिड्डी दल ऊपर ही ऊपर सिद्धार्थनगर और नेपाल की तरफ बढ़ गया है। किसानों ने मामले की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को दी। कृषि अधिकारियों ने भी किसानों को पूरी तरह से सतर्क रहने के आदेश दिए।
ऐसे किसान भगा रहे टिड्डी दल को
टिड्डियों के हमले को कम करने और उनसे निपटने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इस समय टीमें काम कर रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों समेत पुलिस व फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंच कर केमिकल का छिड़काव शुरू किया। टिड्डी दल के हमले की पूर्व आशंका के चलते पहले से अलर्ट प्रशासन ने किसानों को शोर करने जैसे ड्रम, थाली, बैंड बाजा आदि बजाने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि टिड्डियां रात के समय और सुबह के समय, जब टिड्डे पेड़ों में कहीं बैठते हैं, तो इसे रसायन छिड़काव करके नष्ट किया जा सकता है।
दिल्ली और एनसीआर में खास तैयारी
टिड्डियों के हमले को कम करने के लिए खास रणनीति तैयार की जा रही है। दिल्ली-एनसीआर के फरीदाबाद, गुरुग्राम और भिवानी में टिड्डी दल के हमले से बाकी बचे जिलों में खलबली मच गई है। ऐसे में मेरठ में भी टिड्डी दल के हमले की आशंका से ग्रामीण सहमे हुए हैं। जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने गांव-गांव जाकर लोगों को टिड्डी दल से निपटने के उपाय बताने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर में टिड्डी दल के हमले के बाद अब मेरठ में भी उनके हमले की आशंका बनी हुई है। कई जगहों पर ग्राम पंचायतों में आपदा राहत दल पहले ही गठित किए जा चुके हैं। इसके हमले को लेकर गांव-गांव कृषि विशेषज्ञों की टीम जाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रही है।
टिड्डी दल का आक्रमण होने पर लोग अपने घरों की खिड़की और दरवाजे बंद रखें। टिड्डी का आकार दो से ढाई इंच होता है। यह टिड्डी 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक दिन में 150 किलोमीटर तक उड़ने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टिड्डी दल का हमला होने पर पटाखे, ढोल-नगाड़े, थाली, डीजे बजाकर और शोर मचाकर टिड्डी को खेत और पेड़-पौधों पर ना बैठने दिया जाए। यही नहीं बचाव में यह भी कहा जा रहा है कि खेत किनारे गहरी नाली बनाई जाए ताकि इसके हमले को कम कम किया जा सके। टिड्डी दल पर कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए मेलाथियान 96 प्रतिशत का छिड़काव करने को कहा जा रहा है। इसके अलावा कृषि अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि मेलाथियान पांच फीसदी धूल या फेनबेनरेट 0.5 फीसदी धूल 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने से टिड्डी मर जाती है।
आखिर टिड्डियों जीवन का चक्र
ऐसा कहा जाता है कि टिड्डियों में अलग-अलग तरह के समूह होते हैं। एकांतवासी और झुंड में रहने वाली टिड्डियां होती है। रेगिस्तारी टिड्डी अंडा 10-65 दिन में देती है। जन्म देने के बाद यह 24 से 95 दिन तक टिड्डियां उड़ान भरने वाली नहीं होती है। दुनियाभर में टिड्डियों की 10 हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में केवल रेगिस्तानी टिड्डा, प्रवाजक टिड्डा, बंबई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा ही पाया जाता हैं। देश में पाया जाने वाले रेगिस्तानी टिड्डों को बहुत ही खतरनाक माना जाता है। एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है और एक बार में एक टिड्डी कम से कम 95-158 अंडे देती हैं। इन टिड्डियों का जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है। अगर आकार की बात की जाए तो नर टिड्डे का आकार 60-75 एमएम और मादा का 70-90 एमएम तक होता है।
एक दिन में कई मीलों का सफर
टिड्डियां जब झुंड बहुत ही रफ्तार से चलता है। टिड्डियां एक दिन में मीलों का सफर तय करती है। अगर यह झुंड में होती है, एक दिन में 81 मील या इससे अधिक की दूरी तय कर सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार 1954 में एक झुंड ने उत्तर पश्चिम अफ्रीका से ब्रिटेन तक के लिए उड़ान भरी थी। इसके अलावा 1988 में पश्चिमी अफ्रीका से कैरेबियन तक का सफर तय करने में ज्यादा दिन नहीं लगे। टिड्डियों ने महज 10 दिनों में ही 3100 मील तक का सफर तय कर लिया।

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