वाराणसीः केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने सोमवार को प्रेसवार्ता में 2021-22 बजट के बारे में चर्चा की. यहां उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में एक फरवरी को जो केंद्रीय बजट पेश किया गया वह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नए भारत’ के निर्माण की संकल्पना को नई दिशा प्रदान करेगा. वर्ष 2021-22 के लिए कुल 34 लाख 83 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है.

1000 मंडियों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा
केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए कृषि मंत्रालय को 1.31 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. इस वर्ष धान की फसल की एमएसपी पर खरीद भी दोगुनी हो गई है. इसका लाभ 1.5 करोड़ किसानों को मिला है. किसानों को फसल का उचित मूल्य मिल सके इसके लिए मंडियों को डिजिटल व्यापार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. उन्होंने कहा कि 1000 मंडियों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा ताकि किसान अपने उत्पादों को बेहतर मूल्यों पर बेच सके.

‘पहले से अधिक लोन ले सकेंगे किसान’
केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ ने कहा कि पशुपालन, डेयरी और मछली पालने वाले किसानों को पहले की अपेक्षा अधिक लोन दिया जाएगा. इसके अलावा मत्स्य उद्योग और उससे जुड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच नए बंदरगाह बनाने का निर्णय लिया गया है. इस निर्णय से नई नौकरियों का सृजन होगा, जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा.

‘आम बजट से होगा सर्वांगीण विकास’
उद्यमशीलता मंत्री डॉ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 2021-22 का आम बजट नई सोच के साथ आगे बढ़ाने वाला बजट है. यह बजट देश के जन-जन के सर्वांगीण कल्याण के प्रति समर्पित आम बजट है, जिसका लाभ हर वर्ग काे मिलेगा. यह बजट असाधारण परिस्थितियों के बीच पेश किया गया है, इसके बावजूद यह बजट भारत के युवाओं में एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगा. उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती प्रदान करेगा.

आम बजट में कोई वर्ग नहीं रहा वंचितः केंद्रीय मंत्री
डॉ. पाण्डेय ने कहा कि इस बजट से युवाओं, किसानों, महिलाओं, वंचित तबके और हर एक वर्ग को लाभ होगा. इसके अलावा असंगठित श्रम बल प्रवासी श्रमिकों को आगे बढ़ाने के लिए एक पोर्टल लॉन्च करने का निर्णय लिया गया है. इस पोर्टल से प्रवासी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, आवास, कौशल, बीमा, क्रेडिट और खाद्य योजनाओं तैयार करने में मदद मिलेगी. वित्त वर्ष 2021-22 के बजट के द्वारा आत्मनिर्भर भारत के विजन को एक नई गति प्रदान की जा सकेगी.

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