दिल्ली में पकड़े गए आईएसआईएस के सदस्य अबू युसूफ का असली नाम मुस्तकीम था। पुलिस ने जब उसके वह बलरामपुर जिले के उतरौला कोतवाली क्षेत्र के बढ़या भैसाही गांव में दबिश दी तो काफी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, मानव बम वाले दो जैकेट, कई धार्मिक साहित्य व अन्य संदिग्ध चीजें बरामद हुई। करीब चार घंटे तक उसकी पत्नी, बच्चे व पड़ोसियों से पूछताछ करने के बाद अचानक एक टीम और बुलाई गई। इस टीम ने मजूदरों को लेकर मुस्तकीम के घर की खुदाई करवाना शुरू कर दिया। देर रात तक छानबीन हुई।

इस कार्रवाई से पहले तक बलरामपुर पुलिस को मुस्तकीम के आईएसआईएस का सदस्य होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। दरअसल दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जब यूपी के बड़े अफसरों को उसकी गिरफ्तारी और बलरामपुर जिले से सम्बन्ध होने की बात बतायी गई तो आनन फानन डीजीपी मुख्यालय से बलरामपुर के एसपी देवरंजन वर्मा को अलर्ट कर दिया गया। इसके कुछ देर बाद ही दोपहर करीब 12 बजे बलरामपुर पुलिस ने बढ़या भैसाही गांव को सील कर दिया और मुस्तकीम के घर को घेर लिया था। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस को पहले वह युसूफ बताकर सबको गुमराह करता रहा था। बाद में पता चला कि उसका असली नाम मुस्तकीम है और बढ़या गांव में रहने वाले कफील खान का बेटा है।

पत्नी व बच्चों के नाम पासपोर्ट बना था
तलाशी में मुस्तकीम, उसकी पत्नी व चार बच्चों का पासपोर्ट भी बरामद हुआ है। हालांकि इस पासपोर्ट पर मुस्तकीम कहीं गया अथवा नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। गांव के कुछ लोगों ने दबी जुबान पुलिस को यह जरूर बताया कि मुस्तकीम अक्सर गायब हो जाता था, फिर वह कभी एक-दो महीने तो कभी 10-12 दिन में ही आ जाता था। वह कहां जाता था, इस बारे में उसके जवाब पर कई बार संशय बना रहता था।

कई घरों में हुई तलाशी
मुस्तकीम का गांव के कुछ घरों आना-जाना ज्यादा था। यह बात सामने आने पर एटीएस और पुलिस ने इस घरों में भी तलाशी ली। यहां से कुछ दस्तावेज व कुछ लोगों के मोबाइल कब्जे में ले लिये।

उतरौला पुलिस को दी थी लापता होने की सूचना
लखनऊ की तरह की उतरौला में भी मुस्तकीम के घर वालों ने उसके लापता होने की सूचना दी थी। उतरौला कोतवाली की पुलिस उसे ढूंढ़ने भी लगी थी। घर वालों ने पुलिस को बताया था कि वह शुक्रवार को घर से निकलते समय यह कहा था कि लखनऊ में अपने रिश्तेदार के यहां जा रहा था। इस रिश्तेदार ने ही उसके घर की एक युवती की शादी तय करायी थी। पर, रात 10 बजे तक जब वह लखनऊ नहीं पहुंचा था और मोबाइल लगातार स्विच ऑफ मिलता रहा तो परिवारीजनों ने पुलिस को सूचना दे दी थी।

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