जोधपुर : राजस्थान में सीबीआई की जोधपुर कोर्ट ने वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं. जज पीके शर्मा ने उदयपुर के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज साढ़े सात करोड़ रुपए में बेचने के मामले में अरुण शौरी सहित पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. साथ ही उदयपुर कलेक्टर को संपत्ति का रिसीवर नियुक्त किया है और होटल को कुर्क करने के भी आदेश दिए हैं.
साल 2002 में विनिवेश मंत्रालय के तत्कालीन सचिव प्रदीप बैजल पर केंद्र सरकार के कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर मैसर्स लक्ष्मी विलास पैलेस होटल उदयपुर को 252 करोड़ की बजाय साढ़े सात करोड़ में बेच देने का आरोप लगा था. इस पर सीबीआई ने 2014 में FIR दर्ज की थी और बाद में सीबीआई ने जांच कर अंतिम रिपोर्ट पेश की. सीबीआई कोर्ट ने 13 अगस्त 2019 को आगे की जांच के लिए यह मामला सीबीआई को फिर से भेज दिया.
सीबीआई ने इस बार भी पुराने तथ्यों को दोहराते हुए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है. कोर्ट ने प्रस्तुत रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि सीबीआई ने पहले होटल बेचने के मामले को विधि विरुद्ध मानकर प्रकरण दर्ज किया और फिर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी. कोर्ट ने कहा कि जिन तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने अंतिम रिपोर्ट पेश की है, वह मानने योग्य नहीं है. मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति का निर्णय विनिवेश मंत्रालय के अधिकारी प्रदीप बैजल और मंत्री अरुण शौरी ने अपने हाथ में ले लिया. अपनी मर्जी से ही मैसर्स कांति कर्मसे को मूल्यांकनकर्ता नियुक्त कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच में 193 करोड़ 28 लाख रुपए होटल तथा संपत्ति की कीमत 58 करोड़ रुपए आई. जिसके बाद होटल की कुल कीमत 252 करोड़ रुपए थी. उसका केवल सात करोड़ 52 लाख रुपए में ही बेचान कर दिया गया. कोर्ट ने पूर्व मंत्री अरुण शौरी, प्रदीप बैजल, आशीष गुहा, कांतिलाल कर्मसे और ज्योत्सना शूरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 B भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 12 (1) (D) का अपराध बनना पाया गया है. कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ फौजदारी प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए और गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के लिए भी कहा है.

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