राजनीति का एक वो भी दौर था जब हवाओं में नफरत का शोर नहीं था

जी हां आज 20 अगस्त है। आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती है। सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले राजीव के व्यक्तित्व का ही कमाल था कि उनके अपने राजनीतिक विरोधियों से भी निजी रिश्ते हुआ करते थे। एक दूसरे सुख दुख में भागीदार हुआ करते थे। राजनीति के दांव पेंच कूटनीति आरोप प्रत्यारोप से अलग थी उनकी दुनिया। जी हां हम बात कर रहे हैं पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की। कम्प्यूटर क्रांति और संचार क्रांति लाने वाले राजीव गांधी और उनका परिवार इस समय आज की भाजपा के निशाने पर है लेकिन एक दौर वो भी था जब राजीव गांधी की तारीफ भाजपा के पितामह और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी करते थे। प्रधानमंत्री रहते अटल जी ने राजीव की पत्नी सोनिया गांधी व उनके परिवार को पूरा सम्मान दिया। आपको बताते चलें कि आज यानी 20 अगस्त को राजीव गांधी की जयंती है और सत्ताधारी दल के निशाने पर स्व राजीव गांधी का पूरा परिवार है तो दो पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी और स्व अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा ये किस्सा याद आ ही जाता है। नफरतों की आंधी के बीच अटल व राजीव के रिश्तों का दिया आज भी पुराने भाजपाइयों और कांग्रसियों के दिल में आज भी रोशनी भर रहा है। किस्सा कुछ इस प्रकार है। राजीव गांधी की हत्या वाले दिन जब अटल जी से राजीव के बारे दो शब्द बोलने को कहा गया तो उन्होंने एक किस्सा ये कहते हुए सुनाया कि राजीव की वजह से मैं जिंदा हूं। दरअसल बात 1984-1989 के दौर की है जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. तब भारत में इस बीमारी के लिए उत्तम चिकित्सा व्यस्था उपलब्ध न थी. जिसकी वजह से वाजपेयी को इलाज के लिए अमेरिका जाना पड़ता, लेकिन आर्थिक वजहों से वाजपेयी अमेरिका जा पाने में सक्षम नहीं थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने बताया था कि किसी तरह राजीव गांधी को यह बात मालूम पड़ी कि वे किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हे विदेश में इलाज की आवश्यकता है। वाजपेयी ने कहा कि एक दिन राजीव गांधी ने उन्हें अपने दफ्तर में बुलाया और कहा कि उन्हें भारत की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल के साथ संयुक्त राष्ट्र भेजा जा रहा है। राजीव गांधी ने वाजपेयी से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मौके का लाभ लेते हुए वे न्यूयॉर्क में अपना इलाज भी करवा लेंगे। वाजपेयी ने कहा कि वे न्यूयॉर्क गए और इसी वजह से आज जिंदा हैं। न्यूयॉर्क से लौटने के बाद यह वाकया न राजीव गांधी और न ही वाजपेयी ने किसी से साझा किया. दोनों शख्सियतों ने सार्वजनिक जीवन में एक दूसरे के विरोधी की भूमिका निभाई. हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी ने कुछ समय बाद एक पोस्टकार्ड के जरिए संदेश भेजकर राजीव गांधी को इस शिष्टता के लिए धन्यवाद प्रेषित किया. लेकिन राजीव के जीते जी अटल जी ने यह वाकया किसी और से साझा नहीं किया। हां अटल जी जग प्रधानमंत्री बनें तो उन्होंने राजीव के परिवार ख्याल रखा और सोनिया गांधी को भरपूर सम्मान दिया। अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी दोनो ही आज नहीं है लेकिन सार्वजनिक जीवन में एक दूसरे के विरोधी रहते हुए भी निजी रिश्तों को निभाने की सीख जो वो दे गये हैं शायद आज के नेता उससे कुछ सीख पाते। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर शत शत नमन

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