1411023418-6253शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं के मन में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ेगा। चारों ओर का माहौल ‘चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है…!’ ‘जय माता दी’ और ‘जय मां जगदम्बे’ के जयकारों से गूंज उठेगा। सभी भक्त मन, वचन और कर्म से माता को प्रसन्न कर अपनी समस्त मनोकामना को पूर्ण करना चाहते हैं।

शारदीय नवरात्रि में मां भगवती की उपासना मन में सुख-शांति और सम्पन्नता का संवहन करती है। नवरात्रि के पावन पर्व पर व्रत का बड़ा महत्व माना गया है। शास्त्रों की मानें तो कोई भी चीज बिना कठिन तप के प्राप्त नहीं होती। फिर यहां तो माता के आशीर्वाद की बात है, तो कोई कैसे पीछे रह सकता है। देवी की कृपा हो जाए तो बस सारी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाएं।
इसी उद्देश्य से नवरात्रि में नौ दिनों तक व्रत रखे जाएंगे। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत रखेंगे, तो कुछेक प्रतिपदा और फिर अष्टमी पर व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं। इस दौरान युवा, बच्चे और बड़े सभी पूरे श्रद्धा भाव से माता की आराधना में लीन रहेंगे।
नवरात्रि शुरू होते ही लोगों की दिनचर्या में काफी बदलाव आएगा। खास तौर पर महिलाओं की जिम्मेदारियां और बढ़ जाएगी। नवदुर्गा में परिवार में कुछ लोग व्रत रखते हैं और कुछ नहीं। तो सभी की आवश्यकताओं के हिसाब से खाना बनाना पड़ता है। फलाहार के लिए भी विशेष इंतजाम करना होता है। व्रत रखने वाले बच्चों का बहुत ध्यान रखना होता है।
नवरात्रि में कई घरों में पूरा परिवार बड़ी ही श्रद्धा भाव से माता की आराधना करता है। बच्चे भी व्रत रखते हैं। नौ दिनों में जॉब, रात को गरबे की थाप पर नाचना और घर को मैनेज करना थोड़ा कठिन होता है, पर माता की कृपा से नौ दिन भक्ति भाव में निकल जाते हैं और इन दिनों काम की थकान भी नहीं लगती। नवरात्रि में हम जितनी पवित्रता बरतते हैं देवी उतनी ही प्रसन्न होती हैं। ऐसा माता के भक्त मानते हैं।

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