dhanteras28 अक्टूबर दिन शुक्रवार को धनतेरस है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं। इस दिन लोग चांदी व सोने का वस्तुएं खरीदते है। इस दौरान प्रदोष काल होता है। प्रदोष काल में मां महालक्ष्मी की पूजा का सर्वाधिक महत्व है। माना जाता है कि इस दौरान माता लक्ष्मी की पूजा करने से कभी भी घर में दुख, दरिद्र और परेशानी नहीं आती है।

जो कि सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। करते है। यह हमारे यहां का सबसे पुरानी परंपराओं में से एक है। इस परंपरा का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इसके अलावा इस दिन लक्ष्मी-गणेश और धनवंतरी पूजन का भी विशेष महत्व है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त
17:35 से 18:20 ‘स्थिर लग्न के बिना’
अवधि – 45 मिनट्स
प्रदोष काल – 17:35 से 20:11
वृषभ काल – 18:35 से 20:30
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – 27/अक्टूबर/2016 को 16:15 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त – 28/अक्टूबर/2016 को 18:20 बजे

धनतरेस पर लक्ष्मी गणेश की पूजा करने के लिए क्या करें
सबसे पहले एक लकड़ी का पट्टा लें और उस पर स्वास्तिक का निशान बना लें। इसके बाद इस पर एक तेल का दिया जला कर रख दें। दिये के आस पास तीन बार गंगा जल छिड़कें। इसके बाद दीपक पर रोली का तिलक लगाएं और साथ चावल का भी तिलक लगाएं।

इसके बाद दीपक में थोड़ी सी मिठाई डालकर मीठे का भोग लगाएं। फिर दीपक में कुछ रुपया रख दें। रुपए चढ़ाकर देवी लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पण करें। फिर दीपक को प्रणाम करें और आशीर्वाद लें और परिवार के लोगों से भी आशीर्वाद लेने को कहें। इसके बाद यह दिया अपने घर के मुख्य द्वार पर रख दें। ध्यान रखे कि दिया दक्षिण दिशा की ओर रखा हो।

धनवंतरी पूजन
इस पूजा के बाद धनवंतरी पूजन करना भी जरूरी है। इसके लिए अपने घर के पूजा गृह में जाकर ॐ धं धन्वन्तरये नमः मंत्र का 108 बार उच्चारण करें। ऐसा करने बाद स्वास्थ्य के भगवान धनवंतरी से अच्छी सेहत की कामना करें। इसके बाद लक्ष्मी गणेश की पूजा करना जरूर हैं।

इसके लिए सबसे पहले गणेश जी को दिया अर्पित करें और धूपबत्ती चढ़ायें। इसके बाद गणेश जी के चरणों में फूल अर्पण करें और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद इसी तरह लक्ष्मी पूजन करें। इस तरह आप घर पर ही धनतेरस की पूजा कर सकते हैं।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.