pranvनयी दिल्ली। नई सरकार देश के लिए अत्यावश्यक बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए छोटे हवाई अड्डे, उच्च गतिवाली रेलगाडिय़ों के लिए हीरक चतुर्भुज मार्ग और दूर-दराज के इलाकों को बंदरगाहों से जोडऩे वाली सागरमाला परियोजना पर ध्यान केंद्रित करेगी।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि शानदार बुनियादी ढांचे की कमी भारत की प्रमुख बाधाओं में से है। सरकार अगले 10 साल में लागू किए जाने वाले महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम बनाएगी। अभिभाषण में नरेंद्र मोदी की सरकार का दृष्टि पेश किया गया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए तत्परता से से काम करने वाले, निवेश के अनुकूल और भरोसेमंद सार्वजनिक निजी भागीदारी तंत्र की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही रेलवे का आधुनिकीकरण और इसमें सुधार बुनियादी ढांचे के विकास की कार्ययोजना में शीर्ष पर होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि कम लागत वाले हवाईअड्डे बनाए जाएंगे ताकि छोटे शहरों को वायु-संपर्क प्रदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार उच्च गति की रेलगाडिय़ों के लिए एक हीरक चतुर्भुज परियोजना शुरू करेगी। देश में मालवहन गलियारों का नेटवर्क होगा जिसमें जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए विशिष्ट कृषि-रेल नेटवर्क भी शामिल होगा। नव-प्रवर्तनशील वित्तपोषण के जरिए रेल में निवेश बढ़ाया जाएगा। मुखर्जी ने कहा कि पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल लाईनों के विस्तार और रेलवे सुरक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा रेलवे प्रणाली के लिए अनुसंधान एवं विकास और उच्च स्तरीय स्थानीय विनिर्माण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग कार्यक्रम के तेज, समयबद्ध तरीके का कार्यान्वयन किया जाएगा और इनकी अच्छी तरह निगरानी भी की जाएगी ताकि पिछले कुछ साल की निष्क्रियता पर काबू पाया जा सके। सरकार बंदरगाह के नेतृत्व वाले विकास का माडल तैयार करेगी। हमारी सुदीर्घ तट-रेखा भारत की संपननता का मुख्यद्वार होगा। उन्होंने वायदा किया कि सरकार मौजूदा बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करेगी, दूसरी ओर नए वैश्विक स्तर के बंदरगाह भी विकसित करेगी। राष्ट्रपति ने कहा कि सागर माला परियोजना को जोडक़र हम सडक़ और रेल के जरिए दूर-दराज के इलाकों को बंदरगाह से जोड़ेंगे। महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग के तौर पर अंतर्देशीय और तटीय जलमार्ग बनाए जाएंगे।

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