urvarakअब बजट में आवंटन पर निगाह
नयी दिल्ली7 उर्वरक मंत्रालय में नकदी संकट में है। मंत्रालय का 7,000 करोड़ रूपए का बैंकिंग व्यवस्था तथा घरेलू यूरिया विनिर्माताओं का कोष खत्म हो गया है। मंत्रालय की निगाह अब बजट में और धन आवंटन पर लगी है।
इस वर्ष फरवरी में पेश अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वर्ष 2014-15 के लिए 67,970 करोड़ रूपए की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया था। इसमें से 31,000 करोड़ रूपए घरेलू यूरिया, 24,670 करोड़ रूपए बिना नियंत्रण वाले फॉस्फेटिक व पोटाशिक उर्वरक तथा 12,300 करोड़ रूपए आयातित यूरिया के लिए हैं। सूत्रों ने बताया कि अभी तक विनिर्माताओं को घरेलू यूरिया सब्सिडी के लिए अंतरिम बजट के तहत करीब 12,000 करोड़ रूपए तथा बैंकिंंग व्यवस्था के तहत 7,000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। इस समूची राशि का वितरण किया जा चुका है। सूत्रों ने कहा कि उर्वरक मंत्रालय 30 अप्रैल तक ही सब्सिडी बिलों का भुगतान कर पाया है। उसके बाद घरेलू यूरिया सब्सिडी मद के लिए कोई धन नहीं बचा है। मंत्रालय को अंतिम बजट में और धन आवंटन की उम्मीद है। यूरिया का सामान्य तौर पर सर्वाधिक इस्तेमाल किया जाता है और इसका अधिकतम खुदरा मूल्य 5,360 रूपए प्रति टन तय है। सरकार विनिर्माताओं को उत्पादन लागत और एमआरपी के बीच का अंतर का भुगतान सब्सिडी के रूप में करती है। इस बीच उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने भी कहा था कि यूरिया कीमतों को बढ़ाने और सब्सिडी को कम करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वर्ष 2007-08 से देश का यूरिया उत्पादन भी 2.2 करोड़ टन रहा है जबकि मौजूदा मांग करीब तीन करोड़ टन की है जिसके कारण देश को 80 लाख टन की कमी को आयात के जरिए पूरा करना होता है।

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