arun-j3जमाखोरी तथा काला बाजारी रोकने के लिए कड़े उपाय किए जाएंगे और विशेष अदालतें गठित की जाएंगी: जेटली
मोदी सरकार में वित्त मंत्री ने उच्च मुद्रास्फीति तथा कर्ज पर ऊंची ब्याज दर के दुश्चक्र को तोडऩे की नई सरकार की प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आज कहा कि जमाखोरी तथा काला बाजारी रोकने के लिए कड़े उपाय किए जाएंगे और विशेष अदालतें गठित की जाएंगी। जेटली ने साथ ही जिंस कानूनों की समीक्षा की बात भी कही है। राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ आज यहां बजट पूर्व बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि लंबे समय से महंगाई दर ऊंची रहने के कारण आम आदमी की भोजन एवं पोषण सुरक्षा प्रभावित हुई है। हम उच्च मुद्रास्फीति तथा ऊंची ब्याज दर के इस दुश्चक्र को तोडऩे के लिए प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि मुद्रास्फीति ऊंंची रहने के कारण रिजर्व बैंक को नीतिगत ब्याज दर में कमी करना मुश्किल हो रहा है। आरबीआई गवर्नर रघुराम जी राजन ने तीन मई को द्वैमासिक मौद्रिक नीति में रेपो दर को आठ प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। राजन ने कहा था कि नीतिगत ब्याज दर में कमी मुद्रास्फीति में गिरावट पर निर्भर करेगी। उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक वृद्धि में नरमी के साथ उच्च मुद्रास्फीति दबाव से अर्थव्यवस्था के समक्ष कठिनाई पैदा होती है। पिछले दो वर्ष से आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत से नीचे है तथा उद्योग जगत कर्ज सस्ता करने की मांग कर रहा है। जेटली ने कहा कि कुछ राज्य हैं जहां मजबूत आर्थिक वृद्धि हो रही है। लेकिन यह साफ है कि समग्र वृद्धि कम है और इसका समाधान समन्वित प्रयास से किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 2014 का जनादेश स्पष्ट रूप से यह कहता है कि आर्थिक वृद्धि से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता और यदि हमें युवा आबादी का लाभ उठाना है, उच्च आर्थिक वृद्धि दर अनिवार्य शर्त है। वित्त मंत्री ने कीमत में अस्थाई उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए राज्यों से समर्थन की मांग की। उन्होंने कहा कि हम ऐसी प्रणाली तैयार करना चाहेंगे जो आपूर्ति बाधाएं पैदा करने वाले ढांचागत मुद्दों का समाधान करे। हमें अनिवार्य जिंस कानून पर गौर करने की जरूरत है और जमाखोरी तथा काला बाजारी रोकने के लिए कड़े उपाय तथ विशेष अदालत गठित करने की आवश्यकता है। जेटली ने कहा कि एकल कृषि बाजार की जरूरत है। साथ ही किसानों तथा उपभोक्ताओं को कीमतों के बारे में ताजी सूचना मिले, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। आर्थिक एकीकरण के बारे में उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर एक लंबित मामला है जिसपर सहमति बनाने की जरूरत है। जेटली ने कहा कि जीएसटी के क्रियान्वयन से वृद्धि की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है। कुछ जटिल मुद्दे हैं जिसका समाधान करने की जरूरत है और उम्मीद है कि इनका जल्दी ही निपटान कर लिया जाएगा।

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