जिन राज्यों में हिंदी बोली जाती है, वहां लगे एटीएम से जल्द अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी रिसीट मिलने लगेंगी। गृह मंत्रालय ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि वह बैंकों से ऐसे एटीएम लेने के लिए निर्देश दे, जिनमें इस तरह की सुविधा हो।
इकनॉमिक टाइम्स के पास गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र की कॉपी है, जिसे 25 फरवरी को आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन, तब के सेक्रेटरी ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ फाइनैंशल सर्विसेज राजीव टकरू और इंडियन बैंक्स असोसिएशन के चेयरमैन के आर कामत के नाम लिखा गया था। पत्र में कहा गया था कि भविष्य में वही एटीएम लिए जाएं, जिनसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों में रिसीट मिलें। इसके अलावा एटीएम के फॉरेन सप्लायर्स को मौजूदा एटीएम के सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करके हिंदी में भी प्रिंटआउट निकालने लायक बनाने के लिए कहा जाए।
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनैंशल सर्विसेज ने 29 जून को गृह मंत्रालय को जवाब दिया है कि इस बारे में विचार किया जा रहा है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ‘हम इस मामले को देखेंगे। इश्यू यह है कि एटीएम से निकलने वाली रिसीट का प्रिंटआउट उस भाषा में निकले, जिसमें उसका इस्तेमाल हो रहा हो।’

ज्यादातर एटीएम से अंग्रेजी में ही रिसीट निकलती है। भले ही ट्रांजैक्शन हिंदी में किया गया हो। इस मामले में गृह मंत्रालय के कदम उठाने से हो सकता है कि भारतीय बैंकों को एटीएम सप्लाई का काम एक वेंडर कंपनी तक सीमित हो जाए। राजन और टकरू को भेजे गए पत्र में साफ किया गया है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इस्तेमाल हो रहे एटीएम मुख्य रूप से तीन एमएनसी- एनसीआर, विनकॉर और डायबोल्ड से सोर्स की जा रही हैं। पत्र में कहा गया है, ‘इनमें से दो कंपनियों की मशीनों के सॉफ्टवेयर में हिंदी में प्रिंट करने की सुविधा नहीं है।’

पत्र के मुताबिक यूनियन बैंक ने जो एटीएम डायबोल्ड से ली हैं, सिर्फ उन्हीं में हिंदी के अलावा बांग्ला, तमिल और मलयालम सहित सात क्षेत्रीय भाषाओं में प्रिंट आउट लेने की सुविधा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने मंत्रालय को पत्र लिखकर बताया है कि नैशनल कैपिटल रीजन और विनकॉर के एटीएम में यूज होने वाले सॉफ्टवेयर ‘बहुत पुराने’ हैं और उनसे सिर्फ अंग्रेजी में प्रिंट निकलते हैं। मंत्रालय ने आरबीआई को भेजे पत्र में इस लेटर को नत्थी किया था।

मंत्रालय का कहना है कि इससे सरकार की आधिकारिक भाषा नीति पर विरोधाभासी स्थिति बनती है। गृह मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय, इंडियन बैंक्स असोसिएशन और आरबीआई को भेजे लेटर में लिखा है, ‘इस समस्या का मुख्य कारण यह है कि एटीएम के लिए बैंकों की तरफ से दिए जाने वाले टेंडर में यह नहीं लिखा होता है कि उनको अंग्रेजी के अलावा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रिंटआउट की जरूरत होगी। केंद्र की आधिकारिक भाषा नीति के मुताबिक बैंकों को ऐसे उपकरण लेने होंगे, जिनमें अंग्रेजी और हिंदी दोनों में काम करने की सुविधा होगी।’atm_1995820b

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