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हैदराबाद । हैदराबाद यूनिवर्सिटी के करीब 10 से अधिक SC/ST टीचरों ने बुधवार को अपनी ‘प्रशासनिक भूमिका’ से इस्तीफा दे दिया। ये इस्तीफा केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के बयान के विरोध के तौर पर दिया गया है। स्मृति ईरानी ने दलित स्टूडेंट रोहित वेमुला के खुदकुशी के मामले में बोलते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी की दलित फैकल्टी भी उस जांच का हिस्सा थी जिसकी वजह से रोहित समेत 5 दलित स्टू़डेंट्स का निष्कासन हुआ था।

 स्मृति ईरानी ने बुधवार को कहा कि प्रोटोकॉल कमिटी से लेकर एग्जिक्युटिव काउंसिल और उसकी सब कमिटी तक, कई स्तरों पर यूनिवर्सिटी के दलित प्रफेसर स्टूडेंट्स के निष्कासन संबंधी निर्णय में शामिल रहे। यूनिवर्सिटी के दलित प्रफेसरों ने स्मृति ईरानी के इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है।  डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेअर और एससी/एसटी टीचरों ऐंड ऑफिसर फोरम के सदस्य प्रकाश बाबू ने कहा कि मंत्री राष्ट्र को गुमराह कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘हम लोग प्रशासन के अधीन काम नहीं करेंगे। जब से यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई है एग्जिक्युटिव काउंसिल में दलितों का प्रतिनिधित्व है ही नहीं।’

उन्होंने बताया कि करीब 20 एससी/एसटी टीचरों अपनी नौकरी छोड़ना चाहते थे। फैकल्टी मेंबर्स को यह पता चल चुका था कि इस मसले में छात्रों को कोई सपॉर्ट नहीं मिलेगा। तब ये निर्णय लिया गया कि टीचरों प्रशासनिक पदों को छोड़ देंगे। लेकिन पढ़ाना जारी रखेंगे। बाबू ने कहा कि हम सिस्टम में केवल इसलिए बने हुए हैं ताकि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
टीचरों ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी के आधारहीन और गुमराह करने वाले बयान से यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक पदों पर बैठे दलितों का मनोबल गिरा है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के एससी/एसटी टीचरों ऐंड ऑफिसर्स फोरम ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर कहा, ‘इसका (एग्जिक्युटिव काउंसिल की सब कमिटी) नेतृत्व एक ऊंची जाति के प्रफेसर विपिन श्रीवास्तव कर रहे थे। इस सब कमिटी में एक भी दलित मेंबर नहीं थे।’
फैकल्टी मेंबर्स ने आरोप लगाया कि स्मृति ईरानी खुद और बंडारू दत्तात्रेय को रोहित वेमुला की मौत के मामले में बचाने की कोशिश में लगी हैं। इस बीच छात्रों के समूह ने कैंपस के भीतर स्मृति ईरानी के पुतलों को जलाते हुए मांग की है कि बाकी के चार स्टूडेंट्स का निष्कासन तत्काल वापस लिया जाए।

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