Modi Nitishनीतीश कुमार और मोदी की जंग में अब बड़े भी आ गए हैं। संघ ने जहां खलकर मोदी का पक्ष लिया हैं वहीं भाजपा ने जदयू को चुनौती दी है कि राजग से वह नाता तोडना चाहे तो तोड़ ले। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर नीतीश कुमार के बयान पर बीजेपी ने भले ही औपचारिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खुलकर नरेंद्र मोदी के समर्थन में आ गया है। लातूर में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वंयसेवकों को संबोधित करते हुए सवाल किया कि कोई हिंदुत्ववादी भारत का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता? हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन साफ है कि भागवत, मोदी की दावेदारी के समर्थन में खुलकर आ गए हैं। इधर, बीजेपी ने भी संघ के सुर में सुर मिलाते हुए जेडीयू पर हमला बोला है और कहा है कि पार्टी को किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

नीतीश के बयान पर संघ प्रमुख ने एतराज जताते हुए कहा कि उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं है कि कौन धर्मनिरपेक्ष है? उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या आज तक के प्रधानमंत्री धर्मनिरपेक्ष नहीं थे?
मोदी के पक्ष में मोहन भागवत के बयान पर जेडीयू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि पार्टी किसी भी कीमत पर धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने संघ को कड़ी चेतावनी दी है कि बिहार की सरकार रहे या न रहे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन, वे धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अपने कॉमिटमेंट से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जेडीयू गुजरात की हिंसा को नहीं भूली है। तिवारी ने यह भी कहा कि अगर तत्कालीन एनडीए सरकार ने गोधरा की घटना के बाद गुजरात सरकार को हटा दिया होता, तो 2004 में एनडीए को दोबारा सत्ता मिल जाती। उन्होंने कहा कि बीजेपी में दो धड़े काम कर रहे हैं। एक धड़ा पार्टी को एनडीए के एजंडे पर चलाना चाह रहा है तो दूसरा इसको हिंदुत्व की राह पर ले जाना चाह रहा है।
अगर नरेन्द्र मोदी दो बार गुजरात में अपनी सरकार बनवा कर पीएम का दावा ठोंक सकते हैं तो फिर बिहार में लगातार दूसरी बार सरकार बनाने वाले नीतीश क्यों नहीं। भाजपा में मोदी के बढ़ते कद से बेचैन नीतीश ने दबी जुबान से अपने मन की बात कह दी है। नीतीश भले ही कहें कि वह पीएम पद के दावेदार नहीं हैं लेकिन समझने वाले तो समझ ही गए|

बिहार के मुख्यमंत्री नतीश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच जंग अब और तेज हो रही है। कुछ दिन पहले नरेन्द्र मोदी ने बिहार के पिछड़ेपन के लिए नीतीश को जिम्मेदार ठहराया था। मोदी ने अपरोक्ष रूप से नीतीश को ही घेरने की कोशिश की थी। नीतीश ने पलटवार करते हुए सिर्फ इतना ही कहा था कि सूप बोले तो बोले चलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। जद(यू) नेता नीतीश ने प्रधानमंत्री पद के लिए इशारों में ही अपनी दावेदारी का संकेत देते हुए एनडीए की तरफ से पीएम पद के लिए घोषित किए जाने वाले उम्मीदवार के लिए पांच बड़ी शर्तें रख दी हैं। इन शर्तों के आधार पर नरेंद्र मोदी को 100 में से सिर्फ 20 माकर्स मिलेंगे और वह दौड़ से बाहर हो जाएंगे। हालांकि नीतीश ने मोदी का नाम नहीं लिया है। नीतीश कुमार ने कहा कि पीएम के उम्मीदवार को विकसित राज्य का नहीं बल्कि बिहार जैसे कम विकसित राज्यों का होना चाहिए। उम्मीदवार ऐसे राज्यों के प्रति संवेदनशील हो। यह व्यक्ति ऐसा नहीं हो जो विकसित राज्य को और विकसित बनाने पर ही केवल ध्यान दे। बल्कि उसे कम विकसित राज्यों का दर्द भी समझना चाहिए। पीएम पद पर ऐसा उम्मीदवार हो जिसकी सेक्युलर छवि हो। यह शख्स उदार विचारों वाला हो और उसकी लोकतांत्रिक मूल्यों में पूरी आस्था हो। कई धर्मों और भाषा वाले हमारे देश में पीएम पद के लिए उम्मीदवार पर किसी तरह का दाग नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री को सबसे बड़े दल से होना चाहिए। छोटे दल केवल समर्थक की भूमिका निभा सकते हैं। एक यही शर्त है, जो नरेंद्र मोदी पूरी करते हैं। पीएम पद के उम्मीदवार के नाम का ऐलान एडवांस में कर देना चाहिए। एनडीए की ऐसी परंपरा रही है। 1996 और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी पीएम पद के उम्मीदवार थे। 1999 और 2004 में एनडीए ने फिर से वाजपेयी के नाम पर भरोसा जताया। 2009 में लालकृष्ण आडवाणी को पीएम उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया था। ऐसे में 2014 के चुनाव से पहले एनडीए को अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर देना चाहिए। लोगों को यह पता होना चाहिए कि वो आम चुनाव में किसके लिए वोट कर रहे हैं। इसलिए एनडीए को चुनाव के बाद नहीं बल्कि पहले ही पीएम उम्मीदवार का ऐलान करना चाहिए। यह शर्त पूरी करना भी आसान नहीं होगा, क्योंकि भाजपा में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में कई नेता शामिल हैं और नाम घोषित कर दिए जाने से अंदरूनी झगड़ा बढऩे की आशंका बढ़ जाएगी। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर एनडीए में शामिल सभी घटक दलों की सहमति होनी चाहिये। गठबंधन लोगों का विश्वास तभी जीत सकता है जबकि उसका नेता सबको साथ लेकर चलने वाला हो। नीतीश ने भले ही कहा हो कि पीएम पद का उम्मीदवार बिहार जैसे राज्य से होना चाहिए, लेकिन यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और वह इतने बड़े ओहदे का सपना नहीं देखते। नीतीश का निशाना साफ साफ नरेंद्र मोदी की तरफ है जो हाल के दिनों में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में तेजी से आगे आ गये हैं। नीतीश के बयान से यह भी लगता है कि वह किसी भी सूरत में मोदी को इस पद के लायक नहीं समझते। पूर्व मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल मंगलवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। इनके निशाने पर भी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे। केशूभाई पार्टी आलाकमान को अपनी नाराजगी, इसके कारण और राज्य के हालात से अवगत करवाने जा रहे हैं। नीतीश और मोदी के बीच जुबानी जंग अब तेज हो रही है। जब से भाजपा और संघ ने मोदी को आगे कर आगामी लोकसभा चुनाव लडऩे की बात कही है तब से मोदी के विरोधियों के सुर और तेज हो गए हैं। भाजपा और उनके सहयोगी दलों के बड़ों में महात्वाकांक्षाएं कुलाचे मारने लगी हैं। बिहार में लगातार दो बार मुख्यमंत्री रहे नीतीश में उनके समर्थकों ने यह कहते हुए संभावनाएं जगा दी हैं कि जब मोदी गुजरात में दो बार मुख्यमंत्री रहकर प्रधानमंत्री बनने का दावा कर सकते हैं तो फिर वह क्यों नहीं। मोदी सबको साथ लेकर चलने वाले नेता नहीं हैं जबकि नीतीश इस मैनेजमेंट में मोदी से कहीं आगे हैं|

बस पिछले करीब सात सालों से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश ने मोदी के साथ हमेशा दूरी बनाए रखने की कोशिश की है। नीतीश ने मोदी के बिहार चुनाव प्रचार के लिए आने पर गठबंधन तोडऩे की धमकी तक दे दी थी। और तो और उन्होंने गुजरात की तरफ से बिहार में बाढ़ रहत के लिए आए पैसे भी लौटा दिए थे। इस तनातनी के बाद नीतीश और मोदी में दूरियां बहुत बढ़ गई थीं। मई में जब एनसीटीसी पर नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों की बैठक में जब मोदी व नीतीश ने एक दूसरे से हाथ मिलाया तो इस क्षण ने अंतरराष्टï्रीय मीडिया तक में सुर्खियां बटोरी। लेकिन दोनों नेताओं में खटास तब बढ़ गई जब नरेंद्र मोदी ने बिहार पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि बिहार जातिवाद के चलते पिछड़ा है। मोदी ने नीतीश कुमार का नाम लिए बगैर यह भी कह डाला कि हिंदुस्तान ने देखा है कि जो राज्य जातिवाद के जहर में उलझ गए उनका क्या हुआ। बिहार किसी समय कितना शानदार राज्य था लेकिन वहां के जातिवादी नेताओं ने उस राज्य को तबाह करके रख दिया। मोदी की बिहार पर तल्ख टिप्पणी से नीतीश तिलमिला गए और उन्होंने इशारों इशारों में कह ही दिया की सूप बोले तो बोले छलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद। नीतीश के साथ ही बिहार पर मोदी की टिप्पणी से शरद यादव भी खफा हो गए। उन्होंने यहां तक कहा कि मोदी को इतिहास की समझ  नहीं है। जाति इस देश की हकीकत हैं इसके अच्छे व बुरे परिणाम पर बहस की जा सकती है। गुजरात किसी व्यक्ति की वजह से विकसित नहीं है। भौगोलिक कारणों से यह राज्य ज्यादा समृद्ध है। जबकि भाजपा में अपना कद बढऩे के बाद मोदी बेकाबू संघ बेबस और भाजपा असहाय नजर आ रही है|

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