देश के चर्चित आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला मामले में सोमवार को एक नया मोड़ आ गया। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी दलील में कहा है कि सीबीआई को इस केस में जांच का अधिकार ही नहीं है। गौरतलब है कि सरकार ने तकरीबन डेढ़ साल पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस घोटाले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, कई नौकरशाहों और आर्मी के रिटायर्ड अफसरों के नाम भी सामने आए थे। राज्य सरकार के वकील अनिल सखारे ने हाई कोर्ट में कहा कि सीबीआई के पास मामले की जांच का अधिकार नहीं है, क्योंकि न तो राज्य सरकार और न ही हाई कोर्ट ने उसे मामले की जांच सौंपी है। जस्टिस एस. ए. बोबडे और जस्टिस मृदुला भाटकर की डिविजन बेंच ने सखारे को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह जिक्र हो कि राज्य सरकार ने सीबीआई को घोटाले की जांच के लिए अपनी सहमति नहीं दी। सरकारी वकील के मुताबिक, एक न्यायिक आयोग ने पहले ही रिपोर्ट दाखिल कर दी है जिसमें कहा गया है कि जिस जमीन पर आदर्श हाउसिंग सोसायटी की इमारत बनी है वह रक्षा मंत्रालय की नहीं, बल्कि राज्य सरकार की है। इसलिए सीबीआई तस्वीर में नहीं आती। दिल्ली पुलिस स्पेशल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सीबीआई बनाई गई थी और उसके मुताबिक, एजेंसी तभी मामले की जांच कर सकती है जब राज्य सरकार या हाई कोर्ट उसे तफ्तीश का काम दे।
आदर्श सोसायटी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वकील शेखर नफाडे ने भी दलील दी कि सीबीआई के पास मामले की जांच का अधिकार नहीं है। अदालत ने सोसायटी को भी इस पर अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया।

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