बेंगलुरू, 20 फरवरी :भाषा: भारत के रक्षा बाजार में अपना दबदबा बरकरार रखने के लिए रूस ने कहा कि वह भारत के साथ संयुक्त रूप से उत्पाद बनाने के संबंध में भागीदारी का इच्छुक है जिन्हें भविष्य के बाजार मिलेंगे। मेक इन इंडिया पहल के तहत हर तरह के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन का वायदा करते हुए रूसी विनिर्माताओं ने कहा कि वे भारत की निजी कंपनियों के साथ भी भागीदारी करने के इच्छुक है, विशेष तौर पर फलते-फूलते वैमानिकी क्षेत्र में। रूस की सार्वजनिक क्षेत्र की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कार्पोरेशन :यूएसी: के अध्यक्ष यूरी स्लायूसर ने 2015 को बेहद महत्वपूर्ण वर्ष करार देते हुए कहा कि उन्हें पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान :एफजीएफए: के संयुक्त उत्पादन की लंबे समय से अटकी योजना इस साल जोरशोर से शुरू होगी।

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि विभिन्न तरह की भूमिका वाले परिवहन विमानों का संयुक्त उत्पादन बढ़ेगा। यहां आयोजित ‘एयरो इंडियाÓ प्रदर्शनी के मौके पर उन्होंने कहा ”2015 बेहद महत्वपूर्ण वर्ष है जबकि आप प्राथमिक डिजाइन से विस्तृत डिजाइन की दिशा में आगे बढ़ेंगे। मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि भारत के साथ सहयोग का स्तर जितना गंभीर है वैसा किसी अन्य देश के साथ नहीं है।ÓÓ यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कोआपरेशन रूसी वैमानिक उद्योग का प्रमुख संगठन है। स्लायूसर ने कहा कि रूस और भारत मिलकर ऐसे उत्पाद का डिजाइन और विनिर्माण करेंगे जिन्हें भविष्य के बाजार मिलेंगे। उन्होंने कहा ”यह दोनों पक्षों के भरोसे का प्रमाण है। यह हमारे अच्छी भावी संभावनाओं का प्रमाण है।ÓÓ रूस बरसों से भारतीय रक्षा बाजार में प्रभाशाली भूमिका में रहख है लेकिन अब इसे अमेरिका, फ्रांस और इस्रायल जैसे अन्य देशों से भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। अभी भी करीब 60 प्रतिशत भारतीय रक्षा उपकरण रूसी हैं या पूर्ववर्ती सोवियत संघ के देशों मेें बने हैं।

स्लायूसर ने योजनाओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि रूस और भारत संयुक्त रूप से एसयू30 एमकेआई का विनिर्माण कर सकता है। गौरतलब है कि एसयू30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का प्रमुख युद्धक विमान है। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि भारतीय इंजीनियिरों ने एसयू30एमकेआई र्इंजन की ओवरहॉलिंग की कला में निपुणता हसिल कर ली है। सार्वजनिक क्षेत्र की एचएएल ने इस साल जनवरी में भारतीय वायुसेना को पहला ओवरहॉल किया गया सुखोई-30 एमकेआई युद्धक विमान भारतीय वायुसेना को सौंपा जिससे भारत ऐसा इकलौता देश बन गया जो रूस में बने इस विमान में पूरी तरह बदलाव कर सकता है। स्लायसूर ने यह भी कहा कि उनकी भारतीय उद्योग के साथ रूसी गठजोड़ और वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में रूचि है।

उन्होंने कहा कि रूस भारतीय बाजार में सुखोई सुपरजेट 100 पेश करने का इच्छुक है जो एक आधुनिक फ्लाय-बाय-वाय ट्विन ईंजन जेट है जिसमें आठ से 108 सवारियों के बैठने की जगह है।  एफजीएफए के बारे में सुखोई के मुख्य कार्यकारी इगोर ओजार ने कहा कि वार्ता अंतिम चरण में है और कम से कम रूसी पक्ष को उम्मीद हैकि वह 2015 में इस पर हस्ताक्षर करेगा। एफजीएफए पर प्राथमिक डिजाइन समझौते पर एचएएल और रूसी सुखोई डिजाइन ब्यूरो के बीच 2010 में समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था ताकि दोनों ददेशों के उपयोग के लिए विमान बनाए जा सकें। लेकिन अंतिम अनुसंधन एवं विकास अनुबंध जिस पर 2012 में हस्ताक्षर होना था, उसे अभी भी अंतिम स्वरूप नहीं दिया गया है। अनुबंध से नमूने के विकास और उड़ान परीक्षण का रास्ता साफ होगा।

भारत अरबों डालर के इस कार्यक्रम में लागत में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी कर रहा है लेकिन अनुसंधन एवं विकास और कार्यक्रम के अन्य आयामों में हिस्सेदारी घटकर मात्र 13 प्रतिशत रह गई है जिससे भारतीय अधिकारी खुश नहीं है। उनका कहना है कि भारत के पास ऐसे विकसित युद्धक विमान विकसित करने की क्षमता है। काम के बंटवारे का ब्योरा देने से इनकार करते हुए ओजार ने कहा कि हर चीज तय कर ली गई है। सूत्रों ने यह भी कहा कि विमान के अन्य आयामों से भी जुड़े मुद्दे हैं। एफजीएफए परियोजना रूसी वायुसेना के सुखोई टी-50 पाक-एफए मंच पर आधारित है। भारतीय संस्करण में कुछ और विकसित विशिष्टताएं होंगी। इस कार्यक्रम पर भारत करीब 25-30 अरब डालर का निवेश करेगा।

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