एजेंसी। नयी दिल्ली

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमत्र्य सेन ने नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपाति के दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी यह कहते हुए वापस ले ली है कि नरेन्द्र मोदी सरकार नहीं चाहती कि वइ इस पद पर बने रहें। सरकार ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया है। सेन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा कि सेन के कार्यकाल को कम करने का कोई प्रयास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय कार्रवाई नहीं कर सकता क्योंकि अभी तक उसे पिछले माह हुई नालंदा विश्वविद्यालय के संचालन मंडल की बैठक का कार्यवाही विवरण नहीं मिला है।  बहरहाल, सेन ने कहा कि इसका कार्यवाही विवरण एक पखवाड़े पहले ही भेज दिया गया था। सभी ने मंत्रालय के लिए इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने दावा किया कि सामान्य मुद्दा शैक्षणिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप का था। उन्होंने विश्वविद्यालय के कामकाज में सरकार के हस्तक्षेप के कई और उदाहरण दिए।

पिछले काफी समय से मोदी के विरोधी रहे सेन ने नालंदा विश्वविद्यालय के संचालन मंडल को लिखे एक पत्र में नालंदा पीठ के दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी की मंजूरी के अभाव में उनके नाम पर विजीटर, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अनुमति में विलंब हुआ जबकि उनके पास सिफारिश एक माह पहले ही भेज दी गई। सेन ने अपने पत्र में लिखा है, यह विलंब और इसमें शामिल अनिश्चितता के प्रभावस्वरूप नतीजे में एक अंतराल आया। यह नालंदा विश्वविद्यालय के प्रशासन और उसकी शैक्षणिक प्रगति के लिए मददगार नहीं है। सेन ने पत्र में कहा, लिहाजा मैंने निर्णय किया कि नालंदा विश्वविद्यालय के सर्वोत्तम हित में होगा कि इस साल जुलाई के बाद से कुलाधिपति के रूप में पद पर बने रहने के मामले में मैं अपना नाम विचार किए जाने से अलग कर लूं। हालांकि इस मामले में सर्वसम्मति से सिफारिश की गई है और संचालन मंडल ने मुझ से पद पर बरकरार रहने का अनुरोध किया है। यह पूछे जाने पर कि क्या विलंब मोदी के बारे में उनकी आलोचना के चलते हुआ, भारत रत्न से सम्मानित सेन ने कहा, ”मुझे लगता है कि यह नजरिया अपनाना मेरे लिए भ्रमित होने के समान होगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री के निर्णय के संदर्भ में मैं कहीं आता ही नहीं। अटकलबाजी दूसरों को ही लगाने देना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी कहती है कि आप मोदी के आलोचक हैं और वह नहीं चाहते कि आप कुलाधिपति रहे। इन दोनों बातों के बीच मेल है। सेन ने कहा, एक भारतीय मतदाता होने के कारण यह मेरी स्वतंत्रता है कि किसी उम्मीदवार को पसंद करूं या नहीं। कोई बिन्दु उठाउूं या नहीं…कुलाधिपति के बारे में तय करना संचालन मंडल का काम है। इस मामले में यदि प्रधानमंत्री ने कोई निर्णय किया है, तो वह उनका काम नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विजिटर :मुखर्जी: उन्हें कुलाधिपति बनाने के बारे में बहुत अनिच्छुक नहीं हैं तथा सरकार की कोई स्पष्ट मंजूरी नहीं है तो भी कुछ ऐसे साक्ष्य है कि सरकार नहीं चाहती कि वह पद पर बने रहें। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय के संचालन मंडल के मसौदा कार्यवाही विवरण में दो विकल्प हैं..या तो सेन को पद पर बरकरार रखा जाए अथवा विजिटर :मुखर्जी: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति के उत्तराधिकारी को नियुक्त करने के लिए संचालन मंडल से छांटे गए तीन नाम मांगे।

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