इलाहाबाद। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने की आवष्यकता है। विद्यार्थियों से अधिक षिक्षकों का दायित्व है कि हमारी षिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढ़े। उन्होंने कहा कि हमारे देष में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। देश की प्रतिभाओं का सही उपयोग सबको मिलकर देषहित में करना चाहिए। उक्त उद्गार राज्यपाल एवं कुलाधिपति उ.प्र.राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय का नवमदीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करते हुए शनिवार को व्यक्त किया।  उन्होंने कहा कि आज से कई वर्ष पूर्व हमारे देश में बाहर से लोग ज्ञानार्जन करने आते थे और पूरे विश्व में भारत की एक विशिष्ट पहचान थी लेकिन आज संसाधनों के विकसित होने के बाद भी हमारे विष्वविद्यालय काफी पीछे हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज शिक्षा का क्षेत्र बदलता जा रहा है। पाँच-दस वर्षों के उपरान्त बदलती जा रही शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करने की आवष्यकता है। उन्होंने कहा कि राजर्षि टण्डन के नाम पर स्थापित होने पर मुक्त विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा है। नियमित शिक्षा से वंचित लोगों को शिक्षा प्रदान करना राष्ट्रीय पर्व है। मुक्त विश्वविद्यालय प्रदेश का एकमात्र ऐसा विष्वविद्यालय है जो दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ डिप्लोमा भी प्रदान कर रहा है। राज्यपाल श्री नाईक ने कुलपति को निर्देशित किया कि मुख्य अतिथि प्रो. राजन के दीक्षांत भाषण का हिन्दी अनुवाद करवाकर उसकी प्रति सभी उपाधि धारकों को दी जाय। राज्यपाल श्री नाईक ने उपाधि प्राप्त करने वाले षिक्षार्थियों से कहाकि उन्हें अपने व्यक्तित्व का विकास  करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सदा मुस्कराते रहने का गुरू मंत्र दिया। राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में भारतीय वेष में उपाधि प्रदान करने कि संकल्पना पर बल दिया। उन्होंने अंग्रेजी भाषा को आगे बढऩे में मददगार बताते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए।

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