नकल रोकने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने एग्जाम सेंटर में सीसीटीवी लगाने की बात कहीं थी
– 19 फरवरी से शुरू हो रहे बोर्ड एग्जाम से पहले अ भी तक नहीं लेगे कैमरे
– बजट न होने की बात कहकर स्कूलों ने झाड़ा पल्ला
– सरकार के स भी दावें हवा-हवाई साबित हुए

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के बोर्ड एग्जाम 19 फरवरी से शुरू हो रहा है. इस बार के बोर्ड एग्जाम में नकल को रोकने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए थे. पर बोर्ड एग्जाम शुरू होने से छह दिन पहले स ाी मंत्री जी के स ाी दावे हवा-हवाई साबित हो गए है. जिसे दे ाकर यही लगता है कि एक बार फिर से नकल माफिया बोर्ड एग्जाम में अपने मसूबों में कामयाब होने जा रहे है. स्कूलों का कहना है कि सरकार दावे तो बहुत करती है पर उसे अमल में लाने के लिए जरूरी कदम या साधन मुहैया नहीं करा पाती है. इस बार ाी स ाी दावों के बाद ाी पिछले बार की तरह हाल हो गया है.
एक भी  सेंटर पर नहीं लेगें सीसीटीवी कैमरे:-
इस बार यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के बोर्ड एग्जाम में नकल रोकने के लिए सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात माध्यमिक शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने कहा था. मंत्री जी ने सेंटर्स को अपने बजट से सेंटर्स पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए कहा था. पर सेंटर्स बने स्कूलों में किसी एक स्कूल ने अ ाी तक अपने यहा पर सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था नहीं कर सका है. स्कूलों का कहना है कि हमारे पास इतना बजट नहीं है कि हम हर कमरे में सीसीटीवी लगवा सके. माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि एडेड और राजकीय स्कूलों में इतना बजट ही नहीं वह कैमरा लगा सके. अगर शासन को यह नियम लागू करना ही था तो उसे बजट के लिए अलग से व्यवस्था करनी चाहिए थी.
149 सेंटर्स में किसी में कैमरा नहीं:-
राजधानी में इस बार के यूपी बोर्ड के एग्जाम कराने के लिए शिक्षा की ओर से 148 स्कूलों में 149 सेंटर्स बनाए गए है. इन स स्कूलों में करीब 101 एडेड और राजकीय स्कूल शामिल है. शेष सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की हालत तो और बुरी है. ऐसे में नकल माफिया इसका पूरा फायदा उठा सकते है.
ऑनलाइन नहीं जारी हो सका परिचय पत्र:-
यूपी बोर्ड के नकल विहीन परीक्षा के हजार दावे और स्थाई परिचय पत्र बनाने की माध्यमिक शिक्षा परिषद की योजना बुरी तरह फेल हो गई है. माध्यमिक शिक्षा परिषद ने साफ कह दिया है कि वह परिचय पत्र नहीं बनाएगा और हर साल की तरह इस बार भी डीआईओएस ही परिचय पत्र बनाएंगे. वहीं डीआईओएस ने परीक्षा के एक सप्ताह पहले परिचय पत्र छपवाने से इंकार कर अब पिछले साल के ही परिचय पत्रों के लागू कर दिया है. वहीं जिनके पास नहीं है वो डीआईओएस से बनवा सकते हैं. इससे एक बात तो साफ हो गई है कि इस बार भी परीक्षा में फर्जी कक्ष निरीक्षक ड्यूटी करेंगे. पिछले साल इतनी सावधानी के बाद भी फर्जी कक्ष निरीक्षक पकड़ गए थे तो इस बार तो कोई व्यवस्था ही नहीं है. आलम यह है कि परिचय पत्र बनाने के लिए एक फॉर्म पर स्कूलों से हर शिक्षक का अलग.अलग ब्योरा मांगा गया था. अब डीआईओएस ने उसी फॉर्म पर मोहर लगाकर उसी को परिचय पत्र बना दिया है. डीआईओएस का कहना है कि परीक्षा में सिर्फ एक सप्ताह रह गया है ऐसे में परिचय पत्र छपवाने का समय नहीं है. इसलिए जिन शिक्षकों के पास पिछले साल का परियच पत्र है वह उसे ही लगा सकते हैं.
ग्राम पंचायतों ने नहीं कि हेल्प
शासन की ओर से सीसीटीवी लगाने के ऑर्डर के बाद जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों को चुनाव में निगरानी के लिए यूज हुए सीसीटीवी कैमरों को ग्रामीण क्षेत्र में बने सेंटर्स में लगाने के लिए कहा गया था. पर इसके बाद ाी ग्रामीण क्षेत्रों में बने सेंटर्स में अ ाी तक कैमरे नहीं लगाए जा सके है.

“नकल रोकने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जितने ाी दावे किए गए थे वह स ाी हवा-हवाई साबित हो गए है. सीसीटीवी तो दूर ऑनलाइन परिचय पत्र जारी करने की प्रक्रिया ाी पहली बार में ही फेल हो गई है.”
डॉ. आरपी मिश्रा, प्रदेश मंत्री, शिक्षक संघ

” कॉलेजों में बजट न होने के कारण सीसीटीवी नहीं लगाया जा सका है. पर नकल रोकने के लिए हमारी तैयारी पूरी है.”
पीसी यादव, डीआईओएस

mehboob-ali-300x240

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.