सोने की मांग में कमी आने के बावजूद भारत चीन को पछाड़कर एक बार फिर दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश बन गया है। इससे पहले विकास दर में भी चीन को पछाड़ा था। विश्व स्वर्ण परिषद के आज जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले सालभारत में सोने की खपत 842.7 टन रही, जबकि चीन में यह 813.6 टन रही। परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भी भारत सोने का नंबर एक उपभोक्ता बना रह सकता है। उसने कहा है कि दोनों देशों में इस साल पीली धातु की मांग 900 से 1000 टन की बीच रहने की उम्मीद है, लेकिन भारत चीन से बीस साबित हो सकता है। परिषद के भारतीय परिचालन के महानिदेशक सोमसुंदरम् पी.आर. नेइस साल की अपेक्षित मांग के बारे में कहा कि हम दोनों देशों (भारत और चीन) में मांग समान रहने की उम्मीद करते हैं, लेकिन 2015 में भारत में मांग चीन के मुकाबले कुछ ज्यादा रह सकती है।
जेवराती मांग ने बढ़ाया भारत का मान
भारत में जेवराती मांग एक बड़ा कारक है और यह 2015 में भी बाजार को गति देना जारी रखेगी। पिछले साल भी देश में पीली धातु की जेवराती मांग में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी और यह अब तक के रिकॉर्ड स्तर 662 टन पर पहुंच गई। देश में शादी-विवाह में और अलग-अलग हिस्सों में कुछ खास पर्व-त्योहारों के मौके पर स्वर्णाभूषण खरीदने की परंपरा रही है और कीमतें आसमान पर होने के बावजूद लोग इसमें कंजूसी नहीं दिखाते।
सोने की मांग में आई कमी
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल दोनों बड़े उपभोक्ता देशों में सोने की मांग में कमी आई। वैश्विक स्तर पर सोने की मांग जहां पांच साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई, वहीं भारत में इसमें 14 प्रतिशत तथा चीन में 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
चीन में नहीं है आकर्षण
वहीं चीन में पिछले साल जेवराती मांग में 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। परिषद की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर सोने में निवेश में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण चीन में सुरक्षित धातु के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम होना रहा। साथ ही वैश्विक स्तर पर कीमतों में गिरावट के कारण निवेशकों की ओर से आने वाली मांग में भी कम हुई है। large151441

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.