लोवर प्रेप में मनमाने ढंग से आवेदन निरस्त करने के आरोप, प्रिंसिपल को नोटिस भेज 15 दिन में मांगा था जवाब -चुप्पी पर अभिभावक नाराज प्रतिष्ठित क्रि श्चियन स्कूल ला मार्टीनियर गल्र्स कॉलेज की लोवर प्रेप कक्षा का विवाद गरमाने लगा है। दाखिला के कारण और प्रक्रिया को सार्वजनिक न किए जाने से नाराज अभिभावक कॉलेज प्रशासन के खिलाफ न्यायालय जा रहे हैं। कॉलेज प्रशासन पर लोवर प्रेप कक्षा में दाखिले के आवेदनों को मनमाने ढंग से निरस्त करने के आरोप हैं। अभिभावकों की शिकायत है कि कॉलेज प्रशासन ने अगले सत्र के लिए हो रहे दाखिले के आवेदन के समय शर्तों का कोई उल्लेख नहीं किया। बाद में, मनमाने तरीके से आवेदन निरस्त कर दिए गए। अभिभावकों की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने कॉलेज प्रिंसिपल को नोटिस भेजा था। यह नोटिस बीती 24 और 27 जनवरी को भेजे गए। इनमें दाखिले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। साथ ही, आवेदन निरस्त किए जाने के कारणों को स्पष्ट करने को कहा था। कॉलेज को पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने बताया कि अभिभावकों ने न्यायालय जाने का फैसला कर लिया है। अगले सप्ताह में न्यायालय के समक्ष मामले को प्रस्तुत किया जाएगा। उधर, कॉलेज प्रशासन का दावा है कि कॉलेज के कानूनी सलाहकार इस मुद्दे को देख रहे हैं। जल्द से कॉलेज प्रशासन अपना पक्ष रखेगा। वाइस प्रिंसिपल अमिता दास ने बताया कि यह सभी आरोप गलत हैं।

इन मामलों में प्रिंसिपल से मांगे गए थे जवाब:- सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने 24 जनवरी को इंदिरा नगर निवासी अंशुमान सिंह और रागिनी सिंह की ओर से नोटिस भेजा । इसके मुताबिक, अंशुमान सिंह और रागिनी सिंह ने अपनी बच्ची यशस्वी सिंह के लोवर प्रेप में दाखिले के लिए आवेदन किया था। कॉलेज प्रशासन ने आेवरएज कहते हुए उनका फार्म अस्वीकार कर दिया। जबकि, आवेदन के समय आवेदकों की न्यूनतम आयु के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया। मनमाने ढंग से फार्म निरस्त करने के बाद भी आवेदन के 1000 रुपए की फीस वापस नहीं की । – इंदिरानगर के डॉ. शोमित कुमार सिंह की बेटी प्रत्युषा का फार्म अधूरा होने का कारण बताकर अस्वीकार कर दिया। जबकि, अभिभावकों के पास उपलब्ध फार्म की फोटोकॉपी में इसे पूरा दिखाया गया है। कॉलेज में जांच के बाद ही फार्म जमा करने की व्यवस्था है। फिर यदि कोई कमी है तो कॉलेज प्रशासन खुद उसके लिए जि मेदार है। उनकी मानें तो, अभिभावक के पास जमा किए गए फार्म की फोटो कॉपी उपलब्ध है। इसमें, फार्म पूर्ण है। वहीं, दूसरे मामले में फार्म न मिलने का कारण बताकर आवेदन निरस्त किया गया है। जबकि, आवेदन शुल्क डिमांड ड्रा ट के रूप में कॉलेज प्रशासन के खाते में चला गया। (बॉक्स) प्रिंसिपल से इन सवालों के जवाब मांग रहे अभिभावक – शैक्षिक सत्र 2015-16 के लिए इस वर्ष कितने आवेदन आए? कितने स्वीकार किए गए? कितने निरस्त किए गए? निरस्त किए जाने के कारण क्या हैं? – आवेदन के समय बच्ची की आयु के स बन्ध में कोई सूचना नहीं दी गई। फिर, आयु को आधार बनाकर आवेदन क्यों निरस्त कर दिए गए? यह उठाई मांग – कॉलेज में दाखिले की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए। – आवेदन निरस्त किए जाने के कारण स्पष्ट हो। – अस्वीकृत सभी आवेदनों का शुल्क वापस किया जाए।

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