नर्सरी दाखिले के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया ज्यादातर स्कूलों में खत्म हो गई है। इसी के साथ मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कई स्कूलों ने मेरिट सूची जारी भी कर दी है। इस बीच करीब हजार से अधिक अभिभावकों के आवेदन खारिज भी हुए हैं। यदि आप भी उनमें शामिल हैं तो स्कूल से रद्द होने का कारण पूछें। स्कूल को कारण बताना होगा।

निदेशालय और अभिभावक संघ के पास आवेदन खारिज होने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। सबसे अधिक शिकायतें ऑनलाइन आवेदन से जुड़ी हैं। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने पंजीकरण कराया था लेकिन सूची में नाम नहीं आया। जब स्कूल से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने आवेदन खारिज होने की जानकारी दी पर कारण नहीं बताया। बता दें कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के भी आवेदन खारिज हुए हैं। दरअसल, ऑनलाइन आवेदन में कई खामिया बताई जा रही हैं। अभिभावक निदेशालय की साइट पर शिकायत करते हुए बता रहे हैं कि उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण कराया। स्कूल की ओर से पंजीकरण संख्या एसएमएस के जरिए मोबाइल पर भी भेजी गई लेकिन सूची में उनका नाम नहीं आया। प्रीत विहार की गृहणी प्रीति अग्रवाल कहती हैं कि उनके बेटे का फॉर्म खारिज हो गया स्कूल ने सिर्फ इतना ही बताया। खारिज होने का कारण नहीं बताया।

उधर, शिक्षा निदेशालय की ऑनलाइन शिकायत का कामकाज देखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि आवेदन फॉर्म खारिज किन कारणों से हुआ, इसका कारण अभिभावकों को बताना जरूरी है। नियम के तहक कोई भी स्कूल मना नहीं कर सकता। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे आवेदन खारिज होने पर इसकी जानकारी जुटाएं। फीस कितने माह की लेंग, नियम नहीं स्पष्ट: जिन स्कूलों ने मेरिट जारी कर दी है उन्होंने अभिभावकों को दस्तावेजों की जांच के लिए बुलाना शुरू कर दिया है। फीस का ब्योरा भी दिया जा रहा है।

कोई स्कूल एक माह की तो कोई तीन माह की फीस दाखिले के वक्त लेने की बात कह रहा है। लेकिन ऐसा बताने वाले स्कूलों की संख्या कम है। सैकड़ों अभिभावक परेशान हैं कि स्कूल दाखिले के समय एक माह की फीस लेंगे या तीन माह की फीस लेंगे? बता दें कि बीते सत्र के दाखिले में स्कूलों ने तीन माह की फीस ली थी लेकिन हाईकोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा था कि स्कूल एक माह से ज्यादाकी फीस नहीं ले सकते हैं। इस बाबत नियम स्पष्ट न होने के कारण अभिभावक असमंजस में है।

कुछ स्कूलों के खिलाफ निदेशालय को शिकायत
अभिभावक संघ (एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम) के चेयरमैन सुमित वोहरा ने शुक्रवार को दो स्कूलों के खिलाफ शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर शिकायत की है। पत्र में उन्होंने स्नेह इंटरनेशनल और एपीजे की दाखिला नीति को नियमों के विरुद्ध बताया है। उन्होंने स्नेह इंटरनेशनल पर नियमों पर ताक पर रखकर सामान्य वर्ग को अंक देना का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने पीतमपुरा और साकेत स्थित एपीजे स्कूल का मामला भी उठाया। शिक्षा निदेशक पद्मिनी सिंघला से शिकायत की गई है कि एपीजे स्कूल (आरएए) वर्ग में भी अंक दे रहा है। सवाल उठाए गए कि स्कूल इस वर्ग में समाज के विभिन्न वर्गों के बच्चों को सीट देगा? बता दें कि आरएए ऐसा वर्ग है जिसमें स्कूल समाज के सभी तबके और  क्षेत्र से जुड़े अभिभावकों के बच्चों को अंक देकर सीट जारी करने का दावा करते हैं।nursry

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