Reasons-of-Left-Side-Abdominal-Pain-7इंसान भागमभाग वाली दुनिया में हर वक्त भागता रहता है ताकि वह अपने पेट के लिए कमा सके । प्रतिदिल नये नये व्यंजनों का आनंद ले सके। लेकिन अगर पेट में ही जख्म हो जायेगें तब इस भागदौड़ का क्या फायदा। बेहतर है कि अपनी दिनचर्या सुधारें और अल्सर जैसी खतरनाक बीमारी से पेट का बचाव करें।
क्या है अल्सर
गैस्ट्रिक अल्सर पाचन तंत्र के अस्तर पर घावों को कहा जाता है। ये अम्ल (एसिड) की अधिकता के कारण आमाशय या आंत में वाले घाव के कारण होते हैं। अल्सर अधिकतर ड्यूडेनम (आंत का पहला भाग) में होता है। दूसरा सबसे आम भाग पेट है (आमाशय अल्सर)। पैप्टिक अल्सर के कई कारण हो सकते हैं-
जीवाणु का एक प्रकार हेलिकोबैक्टर पाइलोरी कई अल्सरों का कारण है। अम्ल तथा पेट द्वारा बनाये गये अन्य रस पाचन पथ के अस्तर को जलाकर अल्सर होने में योगदान कर सकते हैं। यह तब होता है जब शरीर बहुत ज्यादा अम्ल बनाता है या पाचन पथ का अस्तर किसी वज़ह से क्षतिग्रस्त हो जाए। व्यक्ति में शारीरिक या भावनात्मक तनाव पहले से ही उपस्थित अल्सर को बढ़ा सकते हैं। अल्सर कुछ दवाओं के निरंतर प्रयोग, जैसे दर्द निवारक दवाओं के कारण भी हो सकता है।
अल्सर कई प्रकार का होता है
अमाशय का अल्सर, पेप्टिक अल्सर या गैस्ट्रिक अल्सर। अल्सर उस समय बनते हैं जब खाने को पचाने वाला अम्ल अमाशय की दीवार को क्षति पहुंचाता है। पहले पोषण की कमी, तनाव और लाइफ-स्टाइल को अल्सर का प्रमुख कारण माना जाता था। लेकिन, वैज्ञानिकों ने नये शोध में यह पता लगाया है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी द्वारा होता है।
इस बैक्टीरिया के अलावा अल्सर के लिए कुछ हद तक खान-पान और लाइफस्टाल भी जिम्मेदार है। आइये हम आपको इस बीमारी से बचने के कुछ घरेलू उपचार बताते हैं।

अल्सर से बचने के घरेलू नुस्खे
हालांकि दूध खाने से गैस्ट्रिक एसिड बनाता है, लेकिन आधा कप ठंडे दूध में आधा नीबू निचोडक़र पिया जाए तो वह पेट को आराम देता है। जलन का असर कम हो जाता है और अल्सर ठीक होता है।
पोहा अल्सर के लिए बहुत फायदेमंद घरेलू नुस्खा है, इसे बिटन राइस भी कहते हैं। पोहा और सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लीजिए, 20 ग्राम चूर्ण को 2 लीटर पानी में सुबह घोलकर रखिए, इसे रात तक पूरा पी जाएं। यह घोल नियमित रूप से सुबह तैयार करके दोपहर बाद या शाम से पीना शुरू कर दें। इस घोल को 24 घंटे में समाप्त कर देना है, अल्सर में आराम मिलेगा।
पत्ता गोभी और गाजर को बराबर मात्रा में लेकर जूस बना लीजिए, इस जूस को सुबह-शाम एक-एक कप पीने से पेप्टिक अल्सर के मरीजों को आराम मिलता है।
अल्सर के मरीजों के लिए गाय के दूध से बने घी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
अल्सर के मरीजों को बादाम का सेवन करना चाहिए, बादाम पीसकर इसका दूध बना लीजिए, इसे सुबह-शाम पीने से अल्सर ठीक हो जाता है।
सहजन (ड्रम स्टिक) के पत्ते को पीसकर दही के साथ पेस्ट बनाकर लें। इस पेस्ट का सेवन दिन में एक बार करने से अल्सर में फायदा होता है।
आंतों का अल्सर होने पर हींग को पानी में मिलाकर इसका एनीमा देना चाहिये, इसके साथ ही रोगी को आसानी से पचने वाला खाना चाहिए।
अल्सर होने पर एक पाव ठंडे दूध में उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर देना चाहिए, इससे कुछ दिनों में आराम मिल जायेगा।
छाछ की पतली कढ़ी बनाकर रोगी को रोजाना देना चाहिये, अल्सर में मक्की की रोटी और कढ़ी खानी चाहिए, यह बहुत आसानी से पच जाती है।
अल्सर के रोगी को ऐसा आहार देना चाहिये जिससे पित्त न बने, कब्ज और अजीर्ण न होने पाये। इसके अलावा अल्सर के रोगी को अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जिससे अल्सर को जल्दी ठीक किया जा सके।
प्रस्तुति: पूजा कौशिक

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