पेट्रोल के दाम में 91 पैसे और डीजल में 84  पैसे प्रति लीटर की रविवार को कटौती की गई। अगस्त से कीमतों में यह सातवीं बार कटौती की गई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में नरमी का रुख जारी रहने से पेट्रोल व डीजल के दाम घटाए गए हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कापरेरेशन ने रविवार को इसकी घोषणा करते हुये कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम में कमी रविवार को मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएगी। दिल्ली में पेट्रोल 64.24  रुपये की बजाय अब 63.33 रुपये प्रति लीटर में मिलेगा,  जबकि मुंबई में पेट्रोल के दाम 96 पैसे घटकर 70.95  रुपये प्रति लीटर रह गया हैं।

वहीं दूसरी ओर,  दिल्ली में डीजल सोमवार से 52.51  रुपये प्रति लीटर की कीमत में मिलेगा जो अभी 53.35  रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध है। मुंबई में डीजल की कीमत 93 पैसे घटकर 60.11  रुपये प्रति लीटर रह जाएगी। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय बिक्री कर या वैट की दरें अलग-अलग होने से पेट्रोल व डीजल की कीमतें भिन्न हैं। इससे पहले एक नवंबर को पेट्रोल की कीमत में 2.41  रुपये जबकि डीजल की कीमत में 2.25  रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।

आईओसी ने एक बयान में कहा कि पिछली बार मूल्य में बदलाव के बाद से वैश्विक बाजार में तेल कीमतों में लगातार गिरावट का रुख है। हालांकि,  डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। इन दोनों कारकों के मिले-जुले असर के बाद पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कटौती की गई। आज की गई कटौती को छोड़ दें तो अगस्त के बाद से पेट्रोल के दाम में कुल 9.36  रुपये प्रति लीटर की कटौती की जा चुकी है।

वहीं पांच साल में पहली बार 19 अक्तूबर को डीजल की कीमतें 3.37  रुपये प्रति लीटर घटाई गई थीं। उन्नीस अक्तूबर को सरकार ने डीजल को नियंत्रण मुक्त कर दिया था। इसके बाद एक नवंबर को डीजल के दाम में एक और कटौती की गई।

पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में सोलह नवंबर को डेढ़ रुपये तक की कटौती और होती,  लेकिन सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाकर यह लाभ ले लिया। सामान्य या गैर-ब्रांडेड पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1.20  रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.70 रुपये प्रति लीटर कर दिया,  जबकि गैर-ब्रांडेड डीजल पर उत्पाद शुल्क 1.46  रुपये से बढ़ाकर 2.96  रुपये कर दिया गया।

इसी तरह,  ब्रांडेड पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 2.35  रुपये से बढ़ाकर 3.85  रुपये प्रति लीटर और ब्रांडेड डीजल पर 3.75 रुपये से बढ़ाकर 5.25  रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। जहां वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर खुदरा कीमतों में की गई कटौती से सरकारी खजाने खासकर राज्य सरकारों के खजाने को नुकसान पहुंचता है,  पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कटौती के चलते केंद्र सरकार को कोई नुकसान नहीं होता क्योंकि केन्द्र में इन दोनों ईंधनों पर उत्पाद शुल्क मात्रा के लिहाज से तय है।

उत्पाद शुल्क वृद्धि से केन्द्र सरकार के खजाने में 13,000  करोड़ रुपये की राजस्व आय होगी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां- इंडियन ऑयल कॉपरेरेशन,  बीपीसीएल और एचपीसीएल हर पखवाड़े मूल्यों की समीक्षा करते हैं और प्रत्येक माह की एक तारीख व 16 तारीख को कीमतों में बदलाव करती हैं।petrol

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.