स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा कालाधन अब सोना बनकर भारत आ रहा है। कालाधन मामले की जांच में स्विस बैंकों पर सहयोग के लिए भारत की ओर से दबाव के बीच स्विट्जरलैंड से इस साल अब तक 11 अरब स्विस फ्रैंक यानी करीब 70,000 करोड़ रुपये से अधिक का का सोना देश आ चुका है।

स्विस सीमाशुल्क विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ सितंबर में ही स्विट्जरलैंड से 2.2 अरब डॉलर (करीब 15,000 करोड़ रुपये) से अधिक का सोना निर्यात किया गया जो अगस्त के मुकाबले दोगुना है। यह आंकड़ा स्विट्जरलैंड सरकार की विदेश व्यापार की निगरानी एजेंसी ने तैयार किया है। इसके अनुसार इस साल जनवरी से अब तक स्विट्जरलैंड से 11.4 अरब स्विस फ्रैंक से ज्यादा का सोना भारत को निर्यात किया जा चुका है।

स्विस सरकार के आंकड़ों की मानें तो स्विट्जरलैंड से सितंबर में कुल 347 टन सोने, चांदी और सिक्के का निर्यात हुआ जो करीब 6़62 अरब स्विस फ्रैंक का था। इसमें सोने की मात्रा 172.5 टन थी जो 6.48 अरब स्विस फ्रैंक का था। वहीं, अगस्त में तीन अरब स्विस फ्रैंक का सोना यानी 80.6 टन सोना भारत आया था।

कालेधन की जांच से सतर्क बैंक
बैंकिंग उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, स्विट्जरलैंड स्थित देसी-विदेशी बैंक कालेधन की बढ़ती जांच को लेकर भारतीय ग्राहकों के साथ व्यवहार में सतर्क हो गए हैं। कई बैंक खतरा मोल नहीं लेना चाहते, इसलिए भारतीय ग्राहकों से हलफनामा मांग रहे हैं।

सरकार के साथ लॉबिंग भी जारी
ग्राहकों से हलफनामा मांगने के साथ बैंक संबद्ध बैंकिंग संस्थान के हितों की सुरक्षा के लिए स्विस सरकार के साथ लॉबिंग भी कर रहे हैं। बैंक चाहते हैं कि सुरक्षा के जरूरी प्रावधान के बाद ही स्विस बैंकों के खातों के बारे में भारत सरकार के साथ जानकारी साझा की जाए।

हलफनामा दो, नहीं तो खाता बंद
कुछ बैंक ग्राहकों से कह रहे हैं कि यदि वे ऐसे जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं या उन्हें आशंका है कि ऐसे खाते अपने देश की नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं तो वे अपने खाते बंद करा दें। ग्राहकों के खिलाफ अन्य देशों में नियामकीय कार्रवाई होने की सूरत में बैंक हलफनामे के बहाने साफ बच जाएंगे।

क्या होता है हलफनामे में?
बैंक जो हलफनामा मांग रहे हैं उसमें सारी जिम्मेदारी ग्राहकों पर होती है। इसमें ग्राहक को यह बताना पड़ता है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक यदि नियामकीय या प्रशासनिक कार्रवाई हुई तो उसकी जिम्मेदारी ग्राहक की होगी और वह इस पर सहमति जताते हैं।

आयात में तेजी की वजह
उद्योग पर नजर रखने वाले सितंबर में स्विस सोने के आयात में तेजी के लिए दिवाली और अन्य त्योहारों से पहले सोने की मांग में वृद्धि को वजह बता रहे हैं। लेकिन आशंका यह भी जताई जा रही है कि कालेधन की जांच तेज होने के चलते स्विस बैंकों से पैसे निकाल कर इसे छुपाने के लिए सोने का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कालेधन वालों के नाम खोलने के खिलाफ एसोचैम
विदेशों में कालाधन रखने वालों के नाम उजागर करने की जोर पकड़ती मांग के बीच एसोचैम ने रविवार को कहा कि सरकार को ऐसे नामों का खुलास अपरिपक्व ढंग से नहीं करना चाहिए। इससे कालेधन के खिलाफ मुहिम पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एसोचैम ने एक बयान में कहा, भारतीय नागरिकों व कंपनियों के लिए दोहरे कराधान बचाव करार अहम हैं, क्योंकि इससे वे दो बार टैक्स देने से बच सकते हैं। कथित कालाधन रखने वालों के नामों के खुलासे से भले ही सुर्खियां बन जाएं, लेकिन कालेधन के खिलाफ भारत की लड़ाई निश्चित रूप से कमजोर होगी। नाम का खुलासा होने के बावजूद अगर वे दोषी नहीं साबित हुए तो ऐसे लोगों व इकाइयों की साख को धक्का पहुंचेगा। इसके अलावा, दोहरे कराधान बचाव संधि के उल्लंघन से भारत की साख भी प्रभावित होगी। साथ ही, संगठन ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे विदेशों में कालाधन रखने वाले लोगों या फर्मों से जुड़ी वर्गीकृत सूचनाओं के खुलासे के लिए सरकार पर दबाव बनाते समय उचित वजहों पर ध्यान दें। बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में कहा था कि कोट में मामले दर्ज होने के बाद कालेधन मामले में नामों का खुलासा कर दिया जाएगा।download(7)~26~10~2014~1414330694_storyimage

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