अति गंभीर संक्रामक रोग एंथ्रेक्स से सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित कुरूचडेग गांव सात लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती ने मामले को गंभीरता से लिया और गांव कौ दौरा किया। पहली नजर में सरकार के स्तर पर लगभग इसकी पुष्टि हो चुकी है। देर शाम में आधिकारिक पुष्टि कर दी जाएगी। जिसमें दो लोगो की मौत तो गत 19 अक्टूबर को हेल्थ डायरेक्टरेट की टीम पहुंचने से पहले हुई है। इन सभी की मौत जगह-जगह मामूली घाव के बाद, खून की उल्टी, दस्त के बाद महज 24 से 48 घंटे के अंदर हुई है।

सिमडेगा के सिविल सर्जन डॉ एडीएन प्रसाद ने बताया कि स्टेट टीम ने आठ लोगों को सदर अस्पताल सिमडेगा में जांच के बाद एडमिट कराया था, लेकिन उसमें से भी दो मरीज मंगलवार को भाग गए। छह मरीज फिलहाल एडमिट हैं, उनका इलाज चल रहा है। वहीं पूरे गांव के लोगों को दवा दी जा रही है। हेल्थ डायरेक्टर सह इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलेंस प्रोग्राम (आईडीएसपी) स्टेट अफसर डॉ रमेश प्रसाद ने बताया कि शनिवार को सिविल सर्जन से इसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने रविवार को अपनी टीम के साथ क्षेत्र का जायजा लिया।

मरीजों की स्थिति देखते हुए इसकी सूचना नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को भी दे दी है। रविवार को स्टेट टीम द्वारा स्थिति चिंताजनक बताने के बाद निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य डॉ सुमंत मिश्रा ने सोमवार को ही रिम्स निदेशक को इसकी सूचना देते हुए जांच के लिए एक टीम सिमडेगा भेजने का अनुरोध किया था। जिसके बाद बुधवार को रिम्स के पीएसएम, पैथोलॉजी व मेडिसिन विभाग के तीन सीनियर डॉक्टरों के अलावा जूनियर डॉक्टर व तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गांव पहुंचकर मरीजों की जांच की और सैंपल लिए।

टीम ने गांव के उन मृत जानवरों के भी कुछ नमूने लिए हैं, जिनका मांस खाने के बाद ये लोग बीमार हुए, मौत हुई और देखते ही देखते यह बीमारी फैल गई। इधर, गांव में दहशत का आलम यह है कि सोमवार की रात ग्रामीणों ने एक स्थानीय ओझा को लाठी-डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। उन्हें शक है कि ओझा के कारण ही गांव पर भूत प्रेत का गलत साया पड़ गया है।

स्थानीय पूर्व विधायक नियेल तिर्की कहते हैं इतनी गंभीर बीमारी के संकेत मिलने के बावजूद सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। वहां इलाज करने जा रहे स्वास्थ्य कर्मियों के बचाव के भी समुचित इंतजाम नहीं हैं। न तो मास्क उन्हें दिया गया है, न ही सैंपल को सुरक्षित पहुंचाने के साधन हैं।

बैल का मांस खाने से फैली है बीमारी
आईडीएसपी हेड डॉ रमेश प्रसाद ने बताया कि महज 60 परिवार के इस गांव में मुंडा जाति के लोग रहते हैं। अगस्त में और उसके बाद यहां बारी बारी से तीन चार बैल की मौत हुई थी, जिसका मांस इन लोगों ने खाया था। उसी के बाद से कई लोगों शरीर में जहां तहां घाव होने लगे, कई लोगों को दो से तीन दिन में हंफनी के साथ खून की उल्टी और खून का पखाना होने लगा। और 24 से 48 घंटे के अंदर ही इन लोगों की मौत भी हो गई। डॉ. प्रसाद ने बताया कि अभी जांच में पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन मरीज के सारे लक्षण एंथ्रेक्स जैसे ही हैं। सिविल सर्जन डॉ एडीएन प्रसाद ने बताया कि गांव के सभी व्यक्ति को दवा दी जा रही है।anthrax~24~10~2014~1414140190_storyimage

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