केस 1. ओवेरियन कैंसर से ग्रसित नगमा (55) मंगलवार की शाम जिंदगी मौत से जूझ रही थी। सर्जरी के डॉक्टरों ने ऑपरेशन की तैयारी कर रखी थी। परिजनों ने चार यूनिट रक्त दिया लेकिन वह भी कम पड़ गया। तुरंत दो यूनिट रक्त की और जरुरत थी अन्यथा उसकी जान जा सकती थी। उनके साथ कोई डोनर भी न था। जिंदगी मौत के बीच झूलती नगमा के लिए जार्जियन होप के सदस्य भगवान बनकर आए और जूनियर डॉक्टरों के फोन करने के कुछ देर बाद उन्हें ऑपरेशन के लिए जरुरी दो यूनिट रक्त उपलब्ध करा दिया। आज नगमा ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही हैं।

केस 2. पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट में भर्ती एप्लास्टिक एनीमिया से ग्रसित नेपाल से आए पीयूष (7) की हालत बिगड़ती जा रही थी। उसे तुरंत दो यूनिट रक्त की सख्त जरूरत थी। परिजनों में उसके साथ सिर्फ माता पिता आए थे जो इतने कमजोर कि उनका रक्त लिया नहीं जा सकता था। उसकी जिंदगी बचाने के लिए रक्त बहुत जरूरी था। समस्या का कोई हल निकलता न देख जूनियर डॉक्टरों ने जार्जियन होप के सदस्यों को फोन कर दिया। उन्होंने तुरंत बच्चे की जान बचाने के लिए आवश्यक रक्त उपलब्ध करा दिया।

जार्जियन के होप के सदस्य चिकित्सा विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्र हैं। वे अभी इलाज की बारीकियों को सीख रहे हैं। लेकिन अभी से ये बहुत से मरीजों के भगवान साबित हुए हैं। ये समय समय पर ब्लड बैंक में अपना रक्तदान शिविर लगाते हैं और उसके बदले उनके पास डोनेशन कार्ड रहता है। ट्रामा हो या क्वीनमेरी या फिर सर्जरी और कैंसर विभाग। कहीं भी कोई ऐसा मरीज जिसे रक्त की कमी के कारण जान जाने का खतरा रहता है उसे ये अपने कार्ड के बदले तुरंत रक्त दे देते हैं। रात के दो बजे हों या चार। हर समय ये मरीजों की जान बचाने के लिए तत्पर रहते हैं। चिकित्सा विश्वविद्यालय में ब्लड बैंक प्रभारी प्रो. तूलिका चन्द्रा की माने तो 2008 के बाद से अब तक इन्होंने एक हजार यूनिट से ज्यादा रक्तदान किया। जो जरुरतमंद मरीजों को दिया गया।

क्या है जार्जियन होप

जार्जियन होप की स्थापना 11 मई 2008 को डॉ. अंशुमान, डॉ. हरिमोहन, डॉ. निरुपमा, डॉ. कन्हैया, डॉ. हिमांशु, सुब्रत  सहित अन्य सदस्यों ने की थी। तब से लेकर हर दूसरे तीसरे महीने जार्जियन होप के कैम्प लगाकर रक्तदान करते हैं। इस समय इसकी जिम्मेदारी प्रतीक रस्तोगी, सुनील कुमारनायक, फैज अख्तर, अजहर, सहित अन्य सदस्यों के हाथों में है जो मरीजों को किसी भी समय दिन हो या रात जरुरत पडऩे पर रक्त उपलब्ध करा देते हैं। 60 से ज्यादा छात्र इस ग्रुप के सक्रिय सदस्य हैं। प्रतीक रस्तोगी ने बताया कि जार्जियन होप अब 25 से ज्यादा रक्तदान शिविर आयोजित कर चुका है।

होगा जार्जियन होप का सम्मान

ब्लड बैंक प्रभारी प्रो. तूलिका चन्द्रा ने बताया कि जार्जियन होन ने मरीजों के हित में बहुत अच्छा काम किया है। इसलिए 14 जनवरी को वल्र्ड ब्लड डोनर डे के अवसर पर इन युवा रक्तदाताओं का सम्मान किया जाएगा। इसमें उन युवा रक्तदातों का सम्मान किया जाएगा जिन्होंने चार से अधिक बार रक्तदान किया है। इस अवसर पर जार्जियन होप के सदस्य एक ब्लड डोनेशन कैम्प का भी आयोजन करेंगे।

रक्तदान करें जिंदगी बचाएं

आप 18 से 60 वर्ष की उम्र के हैं तो आपभी रक्तदान कर सकते हैं। आपका रक्त कई लोगों की जिंदगी बचा सकता है। क्योंकि जिंदगी केलिए रक्त जरूरी है। ऐसे में यदि आप शरीर का 300 मिली लीटर खून दान में देते हैं तो उससे चार जिंदगियां बच सकती है। यही वजह है कि रक्तदान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। सिर्फ चिकित्सा विश्वविद्यालय में हर रोज 150 यूनिट खून की मांग आती है। इसमें मेडिकल कालेज केअलावा शहर केविभिन्न अस्पतालों यहां तक कि अन्य शहरों से भी लोग रक्त लेने के लिए आते हैं। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफसर डॉ. तूलिका ने बताया कि ब्लड बैं का 60 प्रतिशत रक्त मेडिकल कॉलेज के मरीजों को दिया जाता है जबकि 40 फीसदी रक्त बाहर के अस्पतालों के मरीजों को दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रक्त दान में उत्तर प्रदेश काफी पीछे है।

उन्होंने बताया कि जार्जियन होप व ब्लड बैंक कर्मचारी भी साल में एक बार ब्लड डोनेट करते हैं। जिससे आम लोगों को यह संदेश पहुंच सके कि डॉक्टर केवल इलाज ही नहीं करते बल्कि रक्तदान भी करते हैं। उन्होंने बताया कि रक्तदान में मात्र 300 मिली लीटर खून ही लिया जाता है। खास बात यह है कि 24 से 48 घंटों के दौरान फिर नया रक्त बन जाता है। इससे किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है और नया रक्त बनता है।

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रक्तदान के लाभ

— रक्तदान के तुरंत बाद से नया खून शरीर में बनने लगता है इससे शरीर में स्फूर्ति आर्ती है।

— रक्तदान करते रहने से हृदय रोग में पांच प्रतिशत की कमी होती है और अस्थिमज्जा (रक्त बनाने वाला अंग) लगातार क्रियाशील रहती है।

— रक्तदान करने से व्यक्ति की हेपेटाइटिस, एचआईवी, मलेरिया सहित अन्य खतरनाक बीमारियों की जांच हो जाती है जिसके लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता है।

— रक्तदान के बदले आप अगले छह माह तक अपने किसी भी परिचित को रक्त दिला सकते हैं।

— एक यूनिट से कई प्रकार के ब्लड कम्पोनेंट बनाकर कई मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है।

— एमबीए, बीटेक, एमसीए, व अन्य छात्रों को नौकरी मिलने में आसानी होती है।

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कौन कर सकता है रक्तदान-

1. 18 से 60 वर्ष की उम्र के महिला और पुरुष जिनका वजन 45 किग्रा. से ऊपर हो।

2. किसी बीमारी से ग्रसित न हो और हीमोग्लोबिन 12.5 मिग्रा. प्रतिशत से कम न हो।

3. रक्तदान से पहले डॉक्टर की जांच होती है।

4. व्यक्ति एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी अन्य बीमारियों से ग्रसित न हो।

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ये नहीं कर सकते रक्तदान

गर्भपात के छह माह तक। प्रसव, टाइफाइड, मलेरिया, टैटू गोदना, टीकाकरण, पीलिया और हीमोग्लोबिन टीका के एक साल रक्तदान सम्भव है। कैंसर, हृदय रोगी, मधुमेह, हेपेटाइटिस बी, एचआईवी, गुर्दा, यकृत, टीबी, लाल रक्त कोशिकाओं की बीमारी से ग्रसित रक्तदान नहीं कर सकते हैं।

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