धर्म के नाम पर अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी उप कोटा दिए जाने को लेकर सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया, जिसके तहत उक्त उप कोटे के प्रावधान को रद्द कर दिया गया है।
न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की पीठ ने कहा हमारा इरादा स्थगन जारी करने का नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने उस याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किए जिसकी जनहित याचिका पर आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने, आईआईटी जैसे केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण में से अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी उप कोटा दिए जाने के प्रावधान को रद्द कर दिया था।

पीठ के समक्ष केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वह दस्तावेज पेश किए जिनके आधार पर उसने उप कोटा बनाया था। पीठ ने सवाल किया क्या आप धर्म के आधार पर वर्गीकरण कर सकते हैं

पीठ ने यह भी कहा कि 22 दिसंबर 2011 को उप कोटा के मुद्दे पर जारी कार्यालय ज्ञापन को विधायी समर्थन प्रापत नहीं था। अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण में अल्पसंख्यकों को 4.5 फीसदी उप कोटा मुहैया कराने के गणित पर सवाल उठाते हुए पीठ ने सरकार से जानना चाहा कि क्या इसके लिए कोई संवैधानिक या वैधानिक समर्थन है।

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