वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार भारत को विश्व में एक विनिर्माण हब के रुप में स्थापित करना चाहती है और आज से शुरू हो रहा ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम एक नारा नहीं, अभियान है।

विज्ञान भवन में तीन हजार से अधिक कंपनियों के 30 देशों से आये 500 मुख्य कार्यकारियों और देश के शीर्ष उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने विदेशी निवेशकों से निडर होकर भारत में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने लाल फीताशाही को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाये हैं। इसके साथ ही निवेशकों की मद्द के लिए एक समर्पित टीम बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि लाल फीताशाही से छुटाकरा दिलाना सरकार का लक्ष्य है। वह निवेश प्रक्रिया को और आसान बनाना चाहती है। विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचें को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। रेलवे और निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को स्वत: मंजूरी के तहत लाया गया है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार का जोर क्वालिटी कंट्रोल पर रहेगा और इस पर निगरानी के लिए आदिल जैनुलभाई की अगुवाई में एक टीम गठित की गई है। ‘मेक इन इंडिया’ के जरिये भारत का हर वर्ष विनिर्माण क्षेत्र को दस प्रतिशत बढ़ावा देने का लक्ष्य है। सरकार चाहती है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण क्षेत्र के हिस्से को 15 प्रतिशत से बढाकर 25 प्रतिशत किया जाये।

भारत अपने यहां विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ाने के लिए चाहता है कि तीन हजार से अधिक कंपनियां, जो यहां अपने उत्पाद बेचती हैं, वह इनका उत्पादन भी यहां शुरू करें। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही देश में बनी चीजों के दाम कम हो जायेंगे, इससे देश में व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।nirmala

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