Raped-2मुजफ्फरपुर। पंच को परमेश्वर माना जाता है, लेकिन कई मामलों में परमेश्वर का फैसला हैवानों जैसा सामने आया है। इसको लेकर बहस भी होती रही है, लेकिन पंच परमेश्वरों ने अपना रवैया नहीं बदला है। कांटी के शुंभकरपुर के पंचों ने भी ऐसा ही कारनामा किया है। इन्होंने 13 साल की बच्ची के गर्भ में पल रहे पांच माह के बच्चे की कीमत दो लाख रुपये तय की है।

पंचों ने फरमान सुनाया, दो लाख रुपये ले लो। बच्ची का गर्भपात करा दो, ताकि मामला ही खत्म हो जाये, लेकिन पीडि़त बच्ची के परिजन गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म लेते देखना चाहते हैं। साथ ही इनकी मांग है कि 35 साल के आरोपित अरुण भगत को उसके किये की सजा मिलनी चाहिए, लेकिन न पंचायत और न पुलिस। कोई इनका साथ नहीं दे रहा है। परिजनों ने पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन उनका आवेदन लेने से इनकार कर दिया गया। अब जब मामला तूल पकड़ने लगा है, तो थानाध्यक्ष कह रहे हैं। जानकारी तो मिली है, लेकिन पीडि़त पक्ष की ओर से आवेदन नहीं दिया गया है।
13 साल की पीडि़ता ने पंचों के सामने जो बात बतायी, वो दिल दलहा देनेवाली थी। उसने बताया 25 मई को वो दुकान पर सामान लेने गयी थी। इसी दौरान अरुण भगत ने उसे पकड़ लिया था। खजुरबनी ले गया, जहां उसके साथ जोर-जबरदस्ती की और कहा, अगर इसकी जानकारी किसी को दोगी, तो हम तुम्हे मार डालेंगे। इसके बाद अरुण ने कई बार उसके साथ जबरदस्ती की। डर के मारे बच्ची चुप रही। सप्ताह भर पहले जब उसके पेट में दर्द हुआ, तो इसकी सूचना उसने अपनी मां को दी। मां उसे लेकर डॉक्टर के पास पहुंची, जहां जांच हुई, तो पूरा मामला सामने आया।
डॉक्टर ने कहा, बच्ची को पांच माह का गर्भ है, ये सुनते ही उसकी मां के तो जैसे होश ही उड़ गये। उन्होंने बच्ची से पूछा, तो उसने पूरी जानकारी दी। गांव में जैसे ही ये जानकारी फैली। अरुण भगत सर्तक हो गया। उसने मौका देख कर बच्ची का गला दबा कर हत्या करने की कोशिश की, लेकिन उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। इससे उसकी जान बच गयी।

20 सितंबर को बच्ची के साथ परिजन कांटी थाने पहुंचे, जहां उन्होंने मामले से संबंधित आवेदन थानाध्यक्ष नंद किशोर प्रसाद को दिया, लेकिन थानाध्यक्ष ने आवेदन लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद 23 सितंबर को पंचायत बैठी। इसमें पीडि़ता के साथ उसके माता-पिता व भाई मौजूद थे। पंचों ने मामले को गांव में ही रफा-दफा करने का फैसला सुना दिया। हालांकि जब पंचायत शुरू हुई, तो मीडिया के लोगों को देख कर पंच इधर-उधर घूमने लगे, जब उन्हें लगा कि मीडिया वाले चले गये हैं, तो उन्होंने मामले की सुनवाई की।

इधर, पूरा मामला सामने आने के बाद पीडि़त परिवार को धमकी मिलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बच्ची के पिता ने बताया, आरोपित अरुण भगत लगातार उन्हें धमका रहा है, जिससे हम लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

पंचों का कहना था, बच्ची का गर्भपात करवा देना चाहिए। पीडि़त पक्ष को दो लाख आरोपित की ओर से दिये जायें, लेकिन ये फैसला पीडि़ता के परिजनों ने मंजूर नहीं किया। उनका कहना था, हमें न्याय चाहिए। आरोपित अरुण भगत को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं, गांव के ज्यादातर लोगों का भी कहना है कि इस मामले में पीडि़त को न्याय मिलना चाहिए। आरोपित अरुण भगत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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