kalash_24_09_2014शारदीय नवरात्र 25 सितंबर यानी कल से शुरू हो रहे हैं। दुर्गाजी की पूजा और कलश स्‍थापना के साथ ही नवरात्र का त्‍योहार शुरू हो जाता है। कुछ बातों का ध्‍यान रखकर इस नवरात्र में माता की कृपा प्राप्‍त करें। जानते हैं इसके शुभ मुहूर्त, उस दौरान कलश स्‍थापना की विधि व अन्‍य बातों के बारे में।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
सुबह 06:19 से 07:47 तक – शुभ
दोपहर 12:11 से 01:28 तक – लाभ
दोपहर 01:28 से 3:17 तक – अमृत
शाम 04:45 से 06:13 तक – शुभ

ऐसे करें कलश स्थापना
पूजा स्‍थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं। फिर उनके ऊपर कलश (अपनी सामर्थानुसार मिट्टी, तांबे या सोने) को रखें। इसके ऊपर मां दुर्गा की मूर्ति को प्रतिष्‍िठत करें। मूर्ति यदि कच्ची मिट्टी या कागज की हो तो इस बात का ध्‍यान रखें कि उसमें कोई विकृति न आए। इसके लिए चाहें तो उसके ऊपर शीशा लगा दें। या कलश पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर दुर्गाजी का चित्र ओर शालीग्राम को विराजित कर भगवान विष्णु का पूजन करें।

दुर्गासप्‍तशती का करें पाठ
नवरात्र व्रत के आरंभ में स्वास्तिक वाचन-शांतिपाठ करके संकल्प लें और प्रथम पूज्‍य भगवान श्रीगणेश की पूजा कर मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुण का विधि अनुसार पूजन करें। उत्‍तर या पूर्व दिशा में मुंह करके पूजा करें। इसके बाद मुख्य मूर्ति का षोडशोपचार पूजन करें। दुर्गा देवी की आराधना-अनुष्ठान में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेयपुराणान्तर्गत निहित श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ नौ दिनों तक करें।

इसका रखें ध्‍यान
इस दौरान यदि हो सके तो अखंड दीप जलाएं। यदि घी का दीपक लगा सकते हैं, तो ध्‍यान रखें कि उसे माता की मूर्ति के दायीं ओर रखें। यदि दीपक तेल का जला रहे हैं, तो ध्‍यान रखें कि उसे मूर्ति के बायीं ओर रखें। यह ज्‍योति घी डालते वक्‍त, बत्‍ती ठीक करते वक्‍त बुझे नहीं इसके लिए छोटे दीपक का इस्‍तेमाल करें। पहले छोटे दीपक को जला लें। यदि अखंड ज्‍योति बुझ जाए तो, दीपक से अखंड ज्‍योति फिर से जलाई जा सकती है। बाद में छोटे दीपक की बाती को घी में डुबोकर बुझा दें।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.