yahho9वॉशिंगटन। अमेरिकी सरकार ने इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी याहू पर उसके ग्राहकों से संबंधित जानकारियां खुफिया एजेंसियों को मुहैया कराने का दबाव बनाया था और ऐसा नहीं करने की सूरत में उस पर प्रतिदिन दो लाख 50 हजार डॉलर का जुर्माना लगाने की धमकी दी थी। याहू के वकील रान बेल ने बताया कि अदालत के कुछ गोपनीय दस्तावेजों को कल सार्वजनिक किए जाने के बाद यह खुलासा हुआ है।
इस नए खुलासे से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के पूर्व अधिकारी एडवर्ड स्नोडेन द्वारा लीक की गई फाइलों में उल्लिखित प्रिज्म जासूसी प्रकरण पर नई रोशनी पड़ी है। इस जासूसी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को याहू और गूगल जैसी प्रमुख इंटरनेट कंपनियों से उनके ग्राहकों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने की अनुमति थी। अमेरिकी सरकार ने ये जानकारियां हासिल करने के लिए एक प्रमुख कानून में संशोधन किया था।
बेल ने कहा है कि इससे साफ पता चलता है कि अमेरिकी सरकार खुफिया एजेंसियों का आदेश नहीं मानने वाली कंपनियों के साथ किस तरह का बर्ताव करती है। इससे यह भी जाहिर है कि अमेरिकी सरकार के आदेश को चुनौती देने पर हमें किस तरह कदम-कदम पर लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि हमने खुफिया एजेंसियों का इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया और अमेरिकी सरकार को अदालत में चुनौती दी।
कंपनी अदालत में अपनी लड़ाई हार गई और उसे अपने ग्राहकों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए मजबूर किया गया। आखिरकार साल 2008 में उन्होंने याहू पर प्रतिदिन 250000 डॉलर का न्यूनतम जुर्माना लगाने की धमकी भी दी। गौरतलब है कि स्नोडेन द्वारा गोपनीय दस्तावेज लीक करने के बाद याहू और अन्य कंपनियों ने अदालती दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की थी ताकि लोगों को यह पता चल सके कि सरकार ने अपने आदेश मानने के लिए किस तरह मजबूर किया और उन्होंने इसका विरोध करने के लिए कितनी लड़ाइयां लड़ी।

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