supreme_court_12914नई दिल्ली। देश में प्राथमिक शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की वकालत करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षा का स्तर बेहतरीन हो सकता है तो ऐसे प्राइमरी स्कूल क्यों नहीं बनाए जा सकते।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अल्पसंख्यक संस्थानों की अपील की सुनवाई के दौरान कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्र के सरकारी संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतरीन होती है और विद्यार्थी इन संस्थानों में ही प्रवेश लेना चाहते हैं।
खंडपीठ ने कहा कि क्या ऐसे ही प्राथमिक स्कूल नहीं खोले जा सकते, ताकि अल्पसंख्यक संस्थानों में प्रवेश लेने की होड़ पर रोक लगाई जा सके। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक संस्थानों को आदेश दिया है कि वे शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर पिछड़े वर्ग के बच्चों को प्रवेश दें। हालांकि इन संस्थानों की दलील है कि सरकार द्वारा वित्त पोषित अथवा वित्त रहित अल्पसंख्यक संस्थानों पर यह प्रावधान लागू नहीं होता है। मामले की अंतिम सुनवाई 10 नवंबर को होगी।

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