2014_9$largeimg202_Sep_2014_111945357तोक्यो|प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि अहिंसा भारतीयों के डीएनए में है|यब बात उन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने की वजह से उपजी अंतराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को दूर करने के लिए कही|

नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि शांति और अहिंसा के लिए देश की प्रतिबद्धता ‘‘भारतीय समाज के डीएनए’’ में रची बसी है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि या प्रक्रियाओं से बहुत उपर है|मोदी ने यहां सैक्रेड हार्ट यूनिवर्सिटी में एक छात्र के प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘भारत भगवान बुद्ध की धरती है| बुद्ध शांति के लिए जिये और हमेशा शांति का पैगाम दिया तथा यह संदेश भारत में गहराई तक व्याप्त है|’’संवाद के दौरान उनसे पूछा गया था कि परमाणु अप्रसार संधि पर अपना रुख बदले बिना भारत अंतराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास कैसे हासिल करेगा|परमाणु हथियार रखने के बावजूद भारत इस संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है|जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां परमाणु बम गिराया गया था। फिलहाल जापान की यात्र पर यहां आए मोदी ने इस अवसर का उपयोग करते हुए तोक्यो के साथ असैन्य परमाणु करार करने के प्रयासों के बीच इस मुद्दे पर अपना यह संदेश दिया|
भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है क्योंकि वह इसे खामीयुक्त मानता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अहिंसा के लिए भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता है और यह ‘‘भारतीय समाज के डीएनए में रची बसी है तथा यह किसी भी अंतराष्ट्रीय से बहुत उपर है|’’उनका संदर्भ भारत के, परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार की ओर था|
मोदी ने संधियों से उपर उठने की जरुरत पर जोर देते हुए कहा, ‘‘अंतराष्ट्रीय मामलों में, कुछ प्रक्रियाएं होती हैं, लेकिन समाज की प्रतिबद्धता सबसे ऊपर है|’’ अपनी बात पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरे समाज के साथ अहिंसा के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए भारत ने इस तरह स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया कि पूरी दुनिया आश्चर्यचकित रह गई|
उन्होंने कहा कि हजारों साल से भारत की आस्था सूत्र वाक्य ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ :पूरी दुनिया एक परिवार है: में रही है| ‘‘जब हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं तो हम ऐसा कुछ करने की कैसे सोच सकते हैं जिससे किसी को नुकसान हो|’’ भारत ने हाल ही में आईएईए के साथ हस्ताक्षरित ‘‘सुरक्षा करार पर अतिरिक्त प्रोटोकॉल’’ :एडीशनल प्रोटोकॉल ऑन सैफेगार्डस एग्रीमेंट: की अभिपुष्टि की है|इस संदर्भ में प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या भारत परमाणु निगरानी एजेंसी के निरीक्षकों को भारत के असैन्य परमाणु संयंत्रों की आसानी से निगरानी की अनुमति देगा|

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