आज गणेश चतुर्थी है। हमारे देश की संस्कृति ही प्राचीन है जिसमें पुराणों और वेदो के अनुसार कथाओं और परंपराओं को माना जाता है। सभी देवी देवताओं की पूजा बड़े धूम धाम के साथ की जाती है। इन्हीं में से एक है गणेश पूजा है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश उत्सव पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन गणेश भगवान अपने भक्तों को मनचाहा वर देते हैं और सभी संकटों को दूर करते हैं।

पुराणों की कथा

शिवपुराण के अनुसार रुद्र संहिता के चतुर्थ खण्ड में यह वर्णित है कि भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व मिट्टी और अपने मैल को मिलाकर एक पुतले का निर्माण किया, जिसके बाद उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर बालक को उत्पन्न किया जिसे उन्होंने अपना द्वारपाल नियुक्त कर दिया. कुछ देर बाद जब भगवान शिवजी ने प्रवेश करना चाहा तब उस बालक ने उन्हें रोक दिया. इस पर भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सिर काट दिया.

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आज गणेश चतुर्थी है। हमारे देश की संस्कृति ही प्राचीन है जिसमें पुराणों और वेदो के अनुसार कथाओं और परंपराओं को माना जाता है। सभी देवी देवताओं की पूजा बड़े धूम धाम के साथ की जाती है। इन्हीं में से एक है गणेश पूजा है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश उत्सव पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन गणेश भगवान अपने भक्तों को मनचाहा वर देते हैं और सभी संकटों को दूर करते हैं।

कैसे करें पूजा?

– इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर सोने, तांबे, मिट्टी अथवा गोबर की गणेशजी की प्रतिमा बनाई जाती है. गणेशजी की इस प्रतिमा पर सिन्दूर चढ़ाकर पूजन करना चाहिए.

– आरती के लिए घी के दीयों का प्रयोग करें.

– गणेशजी को लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है. भोग लगाने के पश्चात् प्रसाद को ब्राह्मणों को भी बांटें.

– चूंकि गणेशजी का जन्म शाम को ही हुआ माना जाता है इसलिए पूजन सायंकाल के समय ही करना चाहिए.

– पूजनोपरांत बिना चांद को देखे हुए अर्घ्य देकर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा भी दें.

इस प्रकार चंद्रमा को अर्घ्य इसलिए देना चाहिए क्योंकि ऐसी धारणा है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए. इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से कलंक का भागी बनना पड़ता है. मिथ्यारोप के कारण आपके ऊपर चोरी का आरोप भी लग सकता है.

गणेशजी का यह पूजन करने से बल, बुद्धि, विद्या के साथ ही ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति भी होती है. इसके साथ ही विघ्न-बाधाओं का भी समूल नाश हो जाता है. महाराष्ट्र में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने का भी प्रावधान है.sidhi 2

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