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महंगाई से जूझ रही जनता को राहत पहुंचाते हुए आम बजट में आयकर छूट सीमा दो लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रूपए कर दी गई जबकि विभिन्न निवेश पर 80सी के तहत मिलने वाली कर छूट सीमा को 50,000 रूपए बढ़ाकर डेढ लाख रूपए कर दिया गया। हालांकि, कर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का पहला आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने आवास रिण के ब्याज पर मिलने वाली कर छूट सीमा को मौजूदा डेढ लाख से बढ़ाकर दो लाख रूपए कर दिया। वरिष्ठ नागरिकों के मामले में तीन लाख रूपए तक की सालाना आय को कर मुक्त कर दिया गया है जबकि 80 वर्ष तथा इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की पांच लाख रूपए तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लगेगा।
बजट में सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला, गुटका और शीतल पेय पर उत्पाद शुल्क बढऩे से ये महंगे हो जाएंगे जबकि गरीबों के इस्तेमाल वाला सीआरटी टीवी, 19 इंच से छोटे एलसीडी और एलईडी टेलीविजन पर सीमा शुल्क कटौती से ये सस्ते हो जाएंगे। घरेलू और विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन का संकेत देते हुए जेटली ने कहा कि आयकर कानून में वर्ष 2012 में पिछली तिथि से किए गए संशोधन के बाद सामने आए तमाम मामलों की एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा जांच की जाएगी। इस समिति का गठन केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा किया जाएगा। जेटली ने देश में स्थिर और भरोसेमंद कर प्रशासन उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हुए कहा, मुझे उम्मीद है कि देश और विदेश का निवेशक समुदाय हममें फिर से विश्वास जताएगा और भारत की आर्थिक वृद्धि में बढ़चढक़र भागीदारी निभाएगा। प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार विभिन्न संबद्ध पक्षों से उनके विचार लेकर इसमें जरूरी सुधार करेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार रक्षा और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत तक बढ़ाकर एफडीआई को बढ़ावा देगी जिसमें प्रबंधन और नियंत्रण पूरी तरह से भारतीय हाथों में होगा। जेटली ने कहा कि प्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में उन्होंने जो रियायतें दी हैं उससे 22,200 करोड़ रूपए के राजस्व का नुकसान होगा जबकि अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में किए गए बदलावों से सरकारी खजाने में 7,725 करोड़ रूपए की प्राप्ति होगी। वित्त वर्ष 2014-15 के लिए कुल 17,94,892 करोड़ रूपए के खर्च के बजट में 12,19,892 करोड़ रूपए गैर-योजना व्यय और 5,75,000 करोड़ रूपए योजना व्यय रहने का अनुमान लगाया गया है। गैर-योजना व्यय में उर्वरक सब्सिडी और सशस्त्र सेनाओं के लिए अतिरिक्त पूंजीगत खर्च शामिल किया गया है।
रक्षा क्षेत्र का आवंटन 12.5 प्रतिशत बढ़ाकर 2.29 लाख करोड़ रूपए किया गया है। बजट में कुल राजस्व प्राप्ति 13,64,524 करोड़ रूपए रहने का अनुमान लगाया गया है जिसमें से केन्द्र सरकार का हिस्सा 9,77,258 करोड़ रूपए होगा। गैर-कर राजस्व प्राप्ति 2,12,505 करोड़ रूपए और उधार को छोड़ पूंजी प्राप्ति 73,952 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.1 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष (2015-16) में 3.6 और 2016-17 में 3 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया है। पिछली सरकार की तरफ इशारा करते हुए जेटली ने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में सुस्ती की वजह से कई अवसर हाथ से निकल गए और दो साल तक पांच प्रतिशत से कम आर्थिक वृद्धि की वजह से चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी है।
जेटली ने कहा कि सरकार ऐसा नीतिगत परिवेश बनाना चाहती है जिसमें वांछित आर्थिक वृद्धि, निम्न मुद्रास्फीति और बाह्य क्षेत्र में दीर्घकालिक संतुलित रूख बनाया जा सके। वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि मौजूदा स्थिति में विनिर्माण क्षेत्र और ढांचागत क्षेत्र में धीमी वृद्धि की चुनौती हमारे सामने है। इसमें वित्तीय स्थिति बेहतर बनाने की आवश्यकता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के समक्ष कर अनुपात में सुधार की जरूरत है और गैर-कर राजस्व में सुधार लाना होगा। उन्होंने सेवाकर के मामले में नकारात्मक सूची को और छोटा करने की पहल भी की है।
जेटली ने कहा कि सरकार व्यय सुधारों के विभिन्न पहलुओं को देखने के लिए एक व्यय प्रबंधन आयोग बनाएगी। इसमें कमजोर और गरीब तबके को पूरी सुरक्षा देते हुए समूचे सब्सिडी कार्यक्रम की जांच परख की जाएगी और जरूरी सुधार किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कर प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू करना चाहेगी ताकि कारोबारी क्षेत्र में उत्पीडऩ कम हो और राजस्व वसूली में सुधा लाया जा सके। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विभिन्न मानकों को पूरा करने के लिए आने वाले वर्षों में 2.40 लाख करोड़ रूपए की आवश्यकता होगी और बैंकों में जनता की सीधे हिस्सेदारी के उपाय किए जाएंगे। वर्ष 2014-15 में कृषि क्षेत्र के लिए 8 लाख करोड़ रूपए के कृषि रिण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही अल्पकालिक फसली कर्ज में समय पर कर्ज लौटाने वाले किसानों को 3 प्रतिशत की ब्याज छूट को इस साल भी जारी रखा जाएगा। बैंक यह कर्ज 7 प्रतिशत की रियायती दर पर उपलब्ध कराते हैं। तय समय पर कर्ज लौटाने वाले किसानों को 3 प्रतिशत की ब्याज रियायत सरकार देती है।
बजट में ग्रामीण ढांचागत विकास कोष को बढ़ाकर 25,000 करोड़ रूपए कर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा के मामले में सरकार ने कहा है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का पुनर्गठन किया जाएगा और सार्वजनिक वितरण योजना (पीडीएस) में राशन के नुकसान और परिवहन लागत को कम करने के उपाय किए जाएंगे। कमजोर तबके को सस्ते दाम पर गेहूं और चावल उपलब्ध कराया जाएगा। आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए ढांचागत और निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के वास्ते बजट में रीएल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट के तहत कर रियायत का प्रस्ताव किया गया है। विनिर्माण क्षेत्र में छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बजट में प्लांट एवं मशीनरी में 25 करोड़ रूपए से अधिक निवेश करने वाली कंपनी को 15 प्रतिशत की दर से निवेश भत्ता देने की घोषणा की गई है। प्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में वित्त मंत्री ने आयकर की कर की दरों में तो कोई बदलाव नहीं किया लेकिन छोटे करदाताओं के मामले में व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा 50,000 रूपए बढ़ाकर ढाई करोड़ रूपए कर दी। 60 वर्ष से अधिक लेकर 80 वर्ष से कम के वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह छूट सीमा तीन लाख रूपए होगी जबकि 80 वर्ष और इससे अधिक के बुजुर्गों की पांच लाख रूपए तक की सालाना आय कर मुक्त रखी गई है। वित्त मंत्री ने कंपनियों, व्यक्तियों और हिन्दू अविभाजित परिवारों, फर्मों पर पहले लगाए गए अधिभार की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री ने कंपनियों पर कर अधिभार बढ़ा दिया था जबकि एक करोड़ रूपए से अधिक कमाई करने वाले व्यक्तियों पर 10 प्रतिशत कर अधिभार लगाया था। शिक्षा उपकर को 3 प्रतिशत पर पूर्ववत रखा गया है।
जेटली ने निवेश से जुड़ी छूट को कुछ नए क्षेत्रों तक बढ़ाने की भी पहल की है। उन्होंने लौह अयस्क परिवहन के लिए ‘स्लरी पाइपलाइनÓ में भी निवेश से जुड़ी छूट लागू करने का प्रस्ताव किया है। भारतीय कंपनियों की विदेशी इकाइयों से प्राप्त लाभांश पर 15 प्रतिशत की रियायती दर से कर यथावत जारी रहेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे देश में धन प्राप्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग का काम सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में 60 और आयकर सेवा केन्द्र खोले जाएंगे। बिजली क्षेत्र में जारी संकट को देखते हुए बजट में 31 मार्च 2017 तक बिजली उत्पादन, वितरण और ट्रांसमिशन कार्य शुरू करने वाली कंपनियों को 10 साल का कर अवकाश देने का प्रस्ताव किया गया है।
वित्तीय समावेषी मिशन के तहत शिक्षा और लड़कियों की शादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष लघु बचत योजना शुरू की जाएगी। छोटी बचत करने वालों के लिए बीमा सुरक्षा के साथ एक राष्ट्रीय बचत सर्टिफिकेट योजना शुरू की जाएगी। वहीं लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) के तहत सालाना अधिकतम सीमा को एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रूपए कर दिया गया। रक्षा क्षेत्र में एक रैंक-एक पेंशन नीति को लागू करने के लिए।,000 करोड़ रूपए अलग रखे गए हैं। रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत खर्च लिए अंतरिम बजट में आवंटित राशि के ऊपर 5,000 करोड़ रूपए और बढ़ाए गए हैं। वित्त मंत्री ने एक ‘युद्ध समारक, युद्ध संग्रहालय और राष्ट्रीय पुलिस स्मारकÓ बनाने की घोषणा भी की है। राज्य पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए 3,000 करोड़ रूपए का कोष आवंटित किया गया है।
‘नमामी गंगेÓ नाम से एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का प्रस्ताव किया गया है और इसके लिए चालू वित्त वर्ष के दौरान 2,037 करोड़ रूपए का बजट रखा गया है। गंगा के लिए एक प्रवासी भारतीय कोष भी स्थापित किया जाएगा जो कि विशेष परियोजनाओं के लिए होगा। केदारनाथ, वाराणसी, हरिद्धार, कानपुर, इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में नदियों के घाटों और तटों के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। जेटली ने कहा कि हरिद्वार से लेकर हल्दिया तक अंतरदेशीय जलमार्ग विकास के लिए 4,200 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं।।,620 किलोमीटर का यह कार्य 6 साल में पूरा होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने कुल योजना खर्च में 10 प्रतिशत खर्च पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए रखा था। यह कोष समाप्त नहीं होगा। इस बजट से हमने एक अलग वक्तव्य प्रकाशित करना शुरू किया है जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए आवंटन को अलग से दिखाया जाएगा। वित्त वर्ष 2014–15 के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 53,706 करोड़ रूपए का बजट आवंटन किया गया है। इस बार के बजट में महिलाओं पर केंद्रित कुल व्यय का प्रावधान 98,030 करोड़ और बाल कल्याण के लिए प्रावधान 81,075 करोड़ रूपए के हैं।

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