John McCain meets PMप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ रणनीतिक भागेदारी को और मजबूत बनाने की इच्छा जतायी है। श्री मोदी ने यह इच्छा अमेरिकी सीनेटर जान मैकेन से बातचीत में जतायी जिन्होंने यहां प्रधानमंंत्री से मुलाकात की। बातचीत में प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ रणनीतिक भागेदारी को और मजबूत करने तथा उसका विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की यह भागेदारी साझा हितों और मूल्यों तथा एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि सितंबर में प्रस्तावित उनकी अमेरिका यात्रा के अच्छे परिणाम सामने आयेंगे तथा द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम मिलेगा। आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार दोनों ने इराक और अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा की। इस दौरान श्री मोदी ने विश्व में आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर चिंता जतायी और कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष विश्व की पहली प्राथमिकता होनी चाहिये।
श्री मैकेन ने भी भारत के साथ रणनीतिक भागेदारी और सुदृढ़ करने के लिये श्री मोदी के साथ काम करने की अमरीका की इच्छा से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अमरीका को उम्मीद है कि नयी सरकार के अधीन देश के आर्थिक विकास को नयी गति मिलेगी और भारत का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री को उनके प्रयासों में सफलता की शुभकामनाएं दीं। बातचीत में श्री मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक देशों की सफलता और उनके बीच आपसी सहयोग विश्व में शांति. स्थायित्व एवं समृद्धि को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा। इस बीच पेंटागन ने भारत को पोत-रोधी हार्पून मिसाइलें बेचने के अपने फैसले के बारे में अमेरिकी कांग्रेस को सूचित करते हुए कहा है कि इससे भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्ते मजबूत होंगे और अमेरिका के एक अहम सहयोगी देश की सुरक्षा मजबूत होगी। इन मिसाइलों की अनुमानित लागत लगभग 20 करोड़ डॉलर है। रक्षा मंत्रालय की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने कहा कि विदेशी सैन्य बिक्री के तहत बेचे जाने वाले इस पूरे पैकेज में लगभग एक दर्जन यूजीएम-84एल हार्पून ब्लॉक 2 एनकैप्सुलेटेड मिसाइल, 10 यूटीएम-84एल हारपून एनकैप्सुलेटेड प्रशिक्षण मिसाइलें और दो एनकैप्सुलेटेड हार्पून प्रमाणीकरण प्रशिक्षण वाहन शामिल हैं। पेंटागन ने यह भी कहा कि हार्पून मिसाइल प्रणाली को भारतीय नौसेना के शिशुमार वर्ग की पनडुब्बी में लगाया जाएगा और यह समुद्र में संचार की लाइनों की सुरक्षा की क्षमताओं को बढ़ाएगा।
अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा भाजपा की निगरानी किए जाने के खुलासे के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडेÞगा। एनएसए द्वारा भाजपा की निगरानी किए जाने के खुलासे के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया को लेकर संवाददाताओं के सवाल पर विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने यहां कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। इस सप्ताह के शुरू में वाशिंगटन पोस्ट द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेज में कहा गया था कि एनएसए ने जिन संगठनों की निगरानी के लिए अनुमति मांगी थी उनमे विदेशी राजनीतिक दलों की सूची में भाजपा का नाम था। भाजपा के अलावा सूची में लेबनान का दल अमाल, वेनेजुएला का बोलीवैरियन कॉन्टीनेन्टल कोआॅर्डिनेटर, मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड और ईजिप्शियन नेशनल साल्वेशन फ्रंट तथा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी भी शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभवत: सितंबर में अमेरिका के दौरे पर आएंगे। इस बारे में साकी ने कहा कि मोदी को आमंत्रित किया गया है और हम इस संबंध में बेहद आशान्वित हैं। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में अमेरिकी राजनयिकों ने भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की है।
साकी ने कहा मैं पुष्टि कर सकती हूं कि हमारे दूतावास के राजनयिकों ने उनके विदेश मंत्रालय में अपने समकक्षों से इस मुद्दे पर मिल कर बात की है। भारत का सीधा संदर्भ दिए बिना प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत कर रहा है। साकी ने कहा जैसा कि आप जानते हैं कि 17 जनवरी के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति स्पष्ट करते रहे हैं कि उन्होंने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल को तथा खुफिया समुदाय को अपने विदेशी समकक्षों के साथ सहयोग तथा समन्वय उस तरह गहरा करने के लिए काम करने को कहा है जिससे उनके बीच विश्वास और अधिक गहरा हो। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि क्या भाजपा को उन वैश्विक राजनीतिक संगठनों की सूची से हटा दिया गया है जिनकी एनएसए जासूसी कर रही है या क्या अमेरिका ने मोदी सरकार को भविष्य में ऐसा न करने का कोई आश्वासन दिया है।

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