विधानसभा में गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी एवं समाजवादी पार्टी के सदस्य एक बार फिर साथ-साथ खड़े नजर आये। दोनों दल इस मत के थे कि सीएजी की जिस रिपोर्ट में कुम्भ मेले की गड़बड़ियों एवं स्मारक घोटालों को उजागर किया गया है उस पर सदन के अन्दर चर्चा नहीं करायी जानी चाहिए जबकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सदस्य इस पर तत्काल चर्चा कराने की मांग कर रहे थे। ज्ञातव्य है कि मंगलवार को विधानसभा में पेश की गयी सीएजी की रिपोर्ट में कुम्भ मेला 2013 और स्मारकों के निर्माण में करोड़ों के घोटाले की बात सामने आयी हैं।
इस मुद्दे को लेकर चल रहे हंगामे के कारण 1371200091_largeकी कार्यवाही तीन किस्तों में 45 मिनट तक के लिए स्थगित की गयी और बाद में पांच विभागों, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग, परिवहन, महिला कल्याण एवं बाल विकास तथा पुष्टाहार और संस्कृति विभाग के बजट को बिना किसी चर्चा के और शोर-शराबे के बीच मात्र पांच मिनट में पारित कराकर अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सदन को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
शून्य प्रहर में इस मुद्दे को काम रोकों प्रस्ताव के माध्यम से भाजपा के उप नेता सतीश महाना और कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिंह ने उठाया और कहा कि चूंकि यह करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला है और सीएजी की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत हो चुकी है तथा मीडिया में भी खबरें आ गयी हैं इसलिए सदन का सारा कामकाज रोक कर इस पर चर्चा करायी जानी चाहिए। इस पर अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने व्यवस्था दी कि सीएजी की रिपोर्ट पर पहले पीएसी (पब्लिक एकाउंट कमेटी) विचार करती है इसके बाद वह सदन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है तभी उस पर चर्चा करायी जा सकती है। पहले से चर्चा कराने की कोई परम्परा नहीं रही है। अध्यक्ष की इस व्यवस्था के समर्थन में विकलांग कल्याण मंत्री अम्बिका चौधरी ने भी सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा कराने के प्रस्ताव का विरोध किया। इतने पर नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य भी खड़े हो गये। उन्होंने भी किसी प्रकार की चर्चा का विरोध किया। स्वामी प्रसाद का विरोध इस कारण जायज भी था क्योंकि स्मारकों के घोटाले में बसपा के ही लोग फंसते नजर आ रहे हैं। इसलिए उन्प्होंने चर्चा न होने देने के लिए पूरा जोर लगा दिया।
अध्यक्ष ने काम रोकों प्रस्ताव का अग्राह्य कर दिया और दूसरा मद पुकारने वाले ही थे कि भाजपा के सदस्य वेल में आकर हंगामा करने लगे। वे सीएजी की रिपोर्ट पर तत्काल चर्चा कराने से कम किसी प्रस्ताव पर सहमत नहीं थ्रो। हंगामा थमता न देखकर अध्यक्ष ने सदन को अपराह्न 1 बजे दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया और बाद में दो किस्तों में 15-15 मिनट के लिए और बढ़ा दिया। अपराह्न दो बजे जब सदन बैठा तो कांग्रेस के सदस्य अनÞुग्रह सिंह व प्रदीप माथुर की अगुआई में वेल में आ गये और सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।
कांग्रेसियों को शांत करने की अध्यक्ष ने बहुत कोशिश की किन्तु वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इस पर अध्यक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के दूसरे मद को ले लिया और भाजपा के राधा मोहन दास अग्रवाल इस पर बोलने के लिए खड़े हुए किन्तु शोर-शराबे के बीच उन्हें सुना नहीं जा सका। इस पर अध्यक्ष ने विभागों की अनुदान मांगों को पारित कराने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी और पांच मिनट के भीतर एक-एक करके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग विभाग, परिवहन विभाग, महिला कल्याण, बाल विकास तथा पुष्टाहार और संस्कृति विभाग के बजट को प्रस्तुत करना शुरू कर दिया जो हंगामे के बीच ध्वनि मत से पास होता गया। इसके बाद एक दो औपचारिक कामकाज निपटाकर अध्यक्ष ने दो बजे ही सदन को कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

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