High Speed Trainनरेंद्र मोदी सरकार ने रेलों का किराया-भाड़ा तो बढ़ाया, लोगों की नाराजगी भी मोल ली मगर रेलों की गति और सुविधाओं में अप्रत्याशित वृद्धि की योजना पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। देश में बुलेट ट्रेन की योजना को साकार रूप देने की ओर मोदी सरकार ने कदम बढ़ा लिया है। गुरुवार को दिल्ली से आगरा के बीच सेमी बुलेट ट्रेन का ट्रायल शुरू हो गया। हाईस्पीड ट्रेन दिल्ली से आगरा के लिए रवाना की गयी। 160 किमी की रफ्तार से चलने वाली सेमी बुलेट ट्रेन मात्र 90 मिनट में दिल्ली-आगरा की दूरी तय करेगी। ट्रेन का ट्रायल सुबह 11:15 बजे शुरू किया गया। सरकार ने पहले आगरा से दिल्ली के बीच हाई स्पीड ट्रेन चलाने की घोषणा की और अब दिल्ली चंडीगढ़ और दिल्ली कानपुर रूट पर स्पीड ट्रेन चलाने की ओर काम शुरू कर दिया गया है।
देश में सबसे तेज रफ्तार से चलने वाली पहली सेमी बुलेट ट्रेन में कुल 18 बोगियां होंगी, जिसमें 10 एसी बोगी बनाये गये हैं। इसकी रफ्तार 160 किमी होगी, जो की देश में चलने वाली सभी ट्रेनों की रफ्तार से अधिक है।
दिल्ली से आगरा की दूरी एक सौ पनचानवे किलोमीटर है। अभी इस रूट पर भोपाल शताब्दी सबसे तेज चलने वाली ट्रेन है, जो 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलकर दिल्ली से आगरा की दूरी 126 मिनट में तय करती है। चंडीगढ़ और कानपुर के बीच अभी फिलहाल 110 किमी की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ रही हैं लेकिन इन रूटों में अभी 130 किमी की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की योजना पर काम किया जा रहा है। एक साल बाद इन रूटों पर 160 किमी की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की योजना बनायी जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस रूट पर अब बहुत मामूली कार्य ही बचा हुआ है, जो जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। सूत्र बताते है कि आने वाले जुलाई के बजट में भी इस पर जोर रहेगा।
नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले रेलवे के लिए अपने भाषणों में एक ही जिक्र किया था, देश को बुलेट ट्रेन का वादा। नए रेल मंत्री और प्रधानमंत्री के बीच की पहली मुलाकात में इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने त्वरित गति से काम करने के आदेश दिए हैं, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल नवंबर तक ये शुरू भी कर लिया जाएगा। देश की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन का ट्रायल रन हुआ लेकिन सरकार का सपना इससे भी कहीं आगे है। सरकार ने चुनाव में जिस बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया था उस पर अब काम शुरू हो चुका है। दुनिया के चुनिंदा देश हैं जो बुलेट ट्रेन चला रहे हैं। इनमें जापान, चीन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं। जापान ने कुछ महीने पहले ही ऐसी ट्रेन का परीक्षण किया जिसकी रफ्तार 500 किलोमीटर प्रतिघंटे थी। ये ट्रेन पटरियों पर नहीं बल्कि चुंबकीय ट्रैक पर दौड़ती है। इन्हें मैगलेव ट्रेनों के नाम से जाना जाता है।
भारत को अगर बुलेट ट्रेन चलानी हैं तो मौजूदा पटरियों पर वो इसे नहीं दौड़ा सकता। इसके लिए नए सिरे से पटरियां तैयार करनी होंगी। भारत को पैसा चाहिए होगा इस नए रूट को बिछाने के लिए। इसकी लागत भी आम पटरियों से कहीं ज्यादा है। भारत को वक्त चाहिए होगा क्योंकि नए सिरे से काम करने में लंबा वक्त लगने वाला है। ऐसे में ये सपना तो अच्छा लगता है लेकिन जल्दी में पूरा होता नजर नहीं आता। जापान ने साल 1964 में बुलेट ट्रेन की शुरुआत की थी। अब 2240 किलोमीटर के ट्रैक पर जापान में बुलेट ट्रेन दौड़ती है। फ्रांस ने 1981 में, जर्मनी ने 1991 में और चीन ने 2007 में बुलेट ट्रेन की शुरुआत कर दी थी लेकिन शुरू करने से पहले दशकों की मेहनत लगी थी। भारत की हालत इनसे अलग है। हमारे पर 64 हजार किलोमीटर लंबा नेटवर्क तो है लेकिन उसमें से सिर्फ 15-20 फीसदी ही 170 किलोमीटर की रफ्तार झेलने लायक है।

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