supreme courtउच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर दोहराया है कि उम्र कैद का मतलब पूरी जिंदगी जेल में बिताने से है और दूसरे अपराधों के लिए मिली सजा साथ साथ नहीं चल सकती। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इसके साथ ही उड़ीसा उच्च न्यायालय का फैसला निरस्त कर दिया जिसने निर्देश दिया था कि दोषी की उम्र कैद की सजा सहित विभिन्न सजाएं एक साथ चलेंगी। न्यायाधीशों ने कहा, इस तथ्य के मद्देनजर कि उम्र कैद का मतलब पूरी जिंदगी जेल में गुजारने से है, एक ही मुकदमे में कई अपराधों के लिए लगातार सजा चलने का सवाल ही नहीं उठता। न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि उम्र कैद की सजा का मतलब कैदी की पूरी जिंदगी से है बशर्ते उचित सरकार अपने अधिकार का इस्तेमाल करके दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत पूरी सजा या उसके एक अंश की छूट दे दे। न्यायालय ने दुर्योधन राउत की अपील पर यह व्यवस्था दी। राउत ने उसे दोषी ठहराने और इस संबन्ध में निचली अदालत और उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी।

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