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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र देश में व्यापक उत्पादन का आधार होने के बावजूद विकास की बाधाओं का सामना कर रहा है, जिसे दूर करने के लिए तत्काल और सिलसिलेवार कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। मुखर्जी ने यहां विज्ञान भवन में बुनकरों तथा शिल्पकारों को वर्ष 2011 के लिए दिए जाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार, शिल्प गुरू पुरस्कार तथा संत कबीर पुरस्कार दिए जाने के अवसर पर यह बात कही।
उन्होंने कहा, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस क्षेत्र के व्यापक उत्पादन आधार के बावजूद इसके विकास में बाधाएं आई हैं। रिण सुविधा तक उनकी अपर्याप्त पहुंच, बिचौलियों पर निर्भरता, कच्चे माल की अर्पायप्त उपलब्धता, पुरानी पड़ गई प्रौद्योगिकी तथा बाजारों तक उनकी सीमित पहुंच इस क्षेत्र के लिए हानिकारक रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि इसके अलावा इस क्षेत्र के उत्पादों को सस्ते आयात एवं मशीन निर्मित एवजी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ रहा है। विकास में बाधक इन कारकों पर तत्काल, सिलसिलेवार और विस्तार से ध्यान दिए जाने की जरूरत है और इसके लिए क्षमता, दक्षता, डिजाइन और आधारभूत संरचना की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि बुनकरों तथा शिल्पकारों का काफी अच्छा प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा जनजाति व धार्मिक अल्पसंख्यकों का है। इसके अलावा इस क्षेत्र ने महिलाओं के सशक्तिकरण, युवा तथा अपंग व्यक्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान किया है। इस क्षेत्र की अहमियत बताते हुए मुखर्जी ने कहा कि हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे परिवारों के लिए ना केवल कम निवेश में आय के अवसर प्रदान करता है बल्कि कृषि से इतर भी उनकी आमदनी में अनुपूरक आय का स्त्रोत है। उन्होंने कहा, इस क्षेत्र की सुदृढ़ता के चलते विस्थापन की स्थिति की रोकथाम होने के साथ साथ परंपरागत आर्थिक संबंधों का वजूद कायम रखने में भी मदद मिलती है।

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