Onion-Produce
सूखा पडऩे की आशंका में प्याज के दाम बढ़े रहे आपूर्ति में कोई गिरावट नहीं
नयी दिल्ली। घरेलू बाजार में प्याज के दाम बढऩे से रोकने के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) तय किए जाने के बावजूद देश में प्याज के सबसे बड़े थोक बाजार, लासालगांव में पिछले दो सप्ताह में प्याज का भाव 40 प्रतिशत बढक़र 18.50 रूपए किलो हो गया। राष्ट्रीय बागवानी शोध एवं विकास फाउंडेशन के निदेशक आर पी गुप्ता ने पीटीआई को बताया कि कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों के प्रभावित होने के अनुमानों के बीच दाम बढ़े हैं। व्यापारियों ने कहा कि नासिक के लासालगांव में प्याज कीमत में वृद्धि का प्रभाव दिल्ली के आजादपुर बाजार में भी महसूस किया जा रहा है जहां दाम कीमतें गुणवत्ता के आधार पर 15 से 25 रूपए प्रति किलो के बीच हैं। एनएचआरडीएफ के अनुसार लासालगांव में प्याज के दाम बढक़र 18.50 रूपए प्रति किलो हो गए जबकि 18 जून को ये दाम 13.25 रूपए प्रति किलो पर थे। केन्द्र सरकार ने प्याज निर्यात को नियंत्रित करने और बढ़ती खुदरा कीमतों पर अंकुश लगाने के ध्येय से इसके लिए 300 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य तय कर दिया था। पिछले एक माह में प्याज के दाम 90 प्रतिशत तक बढक़र 18.50 रूपए किलो तक पहुंच गए जो कि 30 मई को 9.75 रूपए किलो पर थे। गुप्ता ने कहा कि सूखा पडऩे की आशंका में प्याज के दाम बढ़े हैं, आपूर्ति में किसी किस्म की कोई गिरावट नहीं है। देश में करीब 39 लाख टन रबी प्याज का भंडारण किया गया है लेकिन कमजोर मानसून की स्थिति में खरीफ फसल के प्रभावित होने पर प्याज का यह स्टॉक पर्याप्त नहीं होगा। मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से कमजोर मानसून रहने का अनुमान जताया है जिसके कारण धान सहित खरीफ फसलों के लिए खतरा उत्पन्न हुआ है। मानसूनी बरसात खेती के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की करीब 40 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा जल से सिंचित हैं। जून से नवंबर के दौरान फसल उत्पादन कम रहने पर घरेलू मांग को भंडार में रखे गए रबी और ताजा खरीफ की फसल के जरिए पूरा किया जाता है। फसल वर्ष 2013-14 जुलाई से जून के दौरान प्याज उत्पादन बढक़र 192 लाख टन होने का अनुमान है जो उत्पादन वर्ष 2012-13 में 168 लाख टन था। इस बीच निर्यात पिछले वित्तवर्ष में घटकर 13.58 लाख टन रह गया जो वर्ष 2012-13 में 18.22 लाख टन था। प्याज मुख्यत: रबी फसल है जिसे पूरे भारत भर में उगाया जाता है। खरीफ सत्र के दौरान इसे मुख्यत: महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है।
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केन्द्र राज्यों से खुदरा स्तर पर प्याज की जमाखोरी को रोकने को कहेगा
नयी दिल्ली। प्याज के थोक बिक्री मूल्य और खुदरा कीमतों के बीच भारी अंतर को देखने के बाद केन्द्र सरकार राज्य सरकारों से स्टॉक की जमाखोरी करने वाले खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहेगी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने आज यह जानकारी दी है।
जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने में अभी तक राज्यों द्वारा उठाए गए कदम से असंतुष्ट मंत्रालय एक ताजा पत्र लिखेगा और उनसे खुदरा तथा थोक बिक्री दोनों ही स्तर पर जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहेगा।
प्याज की खुदरा कीमत 25 से 30 रूपए प्रति किग्रा के दायरे में है जबकि थोक बिक्री मूल्य कीमत राष्ट्रीय राजधानी में 18 रूपए प्रति प्रति किग्रा है। प्याज के थोक बिक्री मूल्य और खुदरा कीमतों में भारी अंतर होने की बात को रेखांकित करते हुए उपभोक्ता मामलों के सचिव केशव देसीराजू ने कहा कि कीमत वृद्धि का कोई कारण नहीं है क्योंकि पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। थोक बिक्री कीमतें कम हैं। उन्होंने कहा कि हमें ज्ञात है कि खुदरा स्तर पर प्याज कीमतों में वृद्धि हो रही है। हमने कई बार राज्य सरकारों से कहा है और हम फिर उन्हें कहेंगे कि वे खुदरा स्तर पर जमाखोरी और कालाबाजारी करने के खिलाफ कार्रवाई करें। जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए देसीराजू ने कहा कि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे तीन राज्यों ने प्याज व्यापारियों पर स्टॉक नियंत्रण आदेश लागू करने के लिए केन्द्र सरकार की अनुमति मांगी है।

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