ramjaanका महीना आ गया है। हर तरफ बाजारों में रौनक है। तपिश और मंदी के कारण मुरझाए दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं। लखनऊ के नक्खास और अमीनाबाद बाजार गुलजार हैं। हैदराबाद, दिल्ली व भोपाल का भी यही हाल है।बरकतों का महीना रमजान सोमवार से शुरू होने जा रहा है। रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बहुत ही खास महीना है। इस महीने में लोग अपना ज्यादातर वक्त खुदा की इबादत में गुजारते हैं। रमजान की आमद पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सहरी और इफ्तार में खाई जाने वाली चीजों की खरीदारी करना शुरू कर दी है। शहर के बाजारों में रमजान की रौनक दिखने लगी है। शहर की मस्जिदों के आस-पास स्थित बाजार खजूर, सेवइयों और फलों की दुकानों से सज गए हैं। रमजान का महीना अल्लाह का महीना माना जाता है। मुसलमान लोग इस महीने में कुराआन और नमाजे पाबंदी से पढ़ते हैं। शनिवार को बाजार वाली मस्जिद के पास खरीदारी करने आए मोहम्मद आदिल ने बताया कि मुसलमान लोग पूरा दिन रोजा रखते हैं। सुबह से शाम तक वह कुछ भी नहीं खाते पीते हैं। जब शाम को मगरबि की आजान होती है, तब सभी रोजादार अपना चाट-पकौडिम्यों से रोजा इफ्तार करते हैं। सुरज निकलने से पहले खाई जाने वाली सहरी में मुसलमान दूध, फैनी और खजला शौक से खाते हैं। इफ्तार के लिए सबसे ज्यादा खजूर और फलों की खरीदारी की जाती है। रमजान के मौके पर इफ्तार में अलग-अलग तरह के लजीज खाने बनाए जाते हैं। मरकज मस्जिद के इमाम ने बताया कि मस्जिद में रमजान के दौरान हजारों की संख्या में नमाजी आते हैं। सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं। बाजारों में हैं 40 तरह के खजूररमजान के महीने में सबसे ज्यादा खरीदारी खजूरों की होती है।
ऐसे में बाजारों में तरह-तरह के खजूर मौजूद है। खजूर विक्रेता मोहम्मद ने बताया कि उनके पास कुल 40 तरह की खजूर है। इनमें बरारी, डेट क्रोन, डब्बास, फर्द प्रमुख हैं। उनके पास 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लेकर 460 रुपये प्रति किलो तक की खजूर है। पिछले साल के मुकाबले सभी खजूरों के दामों में दस से 15 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं सेवईं विक्रेता सुल्तान ने बताया कि उनके पास 12 किस्म की सेवइयां और फैनी हैं। इसमें बनारसी, किमामी सेवइयों की बिक्री सबसे अधिक हो रही है।

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