uma-bharti-13-5गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने की योजना को जन आंदोलन का रूप देने की पहल करते हुए सरकार पांच जुलाई को ‘गंगा मंथनÓ कार्यक्रम आयोजित कर रही जिसमें पर्यावरणविद, वैज्ञानिक, धर्मगुरू, सांसद एवं जन प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। जल संसाधन एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए ‘गंगा मंथनÓ कार्यक्रम नई दिल्ली में पांच जुलाई को आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती का भी कहना है कि गंगा को अवरिल एवं निर्मल बनाने का विषय ऐसा है जो बिना जन आंदोलन के पूरा ही नहीं हो सकता।
मंत्रालय ने पूरे देश के पर्यावरणविदों, जल संसाधन के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, साधु संतो, वैज्ञानिकों के समूहों एवं अन्य शिक्षाविदों को ‘गंगा मंथनÓ कार्यक्रम में एकत्र करने का निश्चय किया है और यह सत्र पांच जुलाई को आयोजित किया जा रहा है। गंगा मंथन में विभिन्न पक्षों से गंगा एवं अन्य नदियों की साफ सफाई और इसके तट पर बसे क्षेत्रों के विकास पर सुझाव मांगे जाएंगे। इसमें पर्यावरण एवं विकास के बीच सामंजस्य स्थापित करने पर भी चर्चा होगी। सचिवों के समूह के सुझावों, मंत्रियों के निष्कर्षो, जानकारों के सुझावों के आधार पर अविरल गंगा, निर्मल गंगा को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इस प्रयास में नदियों के तटों के सांसदों, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। जल संसाधन मंत्रालय गंगा, यमुना एवं अन्य नदियों को निर्मल बनाने के संबंध में एक वेबसाइट तैयार की जा रही है जिस पर दुनिया के विशेषज्ञों से राय देने का आग्रह किया जाएगा। वेबसाइट के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, अभी इस पर काम प्रारंभिक अवस्था में है।

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