modiमहंगाई पर काबू पाने में नाकाम हो रही मोदी सरकार ने चंद महीने बाद राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्राकृतिक गैस कीमतों में तीन महीने तक बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला किया है।
यह बेहद संवेदनशील मामला है क्योंकि गैस का दाम बढऩे का सीधा मतलबए परिवहन से लेकर उर्वरक तक के दामों में बढ़ोतरी। कमरतोड़ महंगाई और रेल किराए बढ़ाए जाने से हो रही आलोचना के कारण केंद्र सरकार को यह फैसला टालना पड़ा। महज एक महीने के अंदर ही लोग नई सरकार से इस कदर निराश होने लगे हैं कि जिस दिल्ली में भाजपा ने चार कांग्रेसी सांसदों की जमानतें जब्त करवा कर सातों सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी वही पार्टी राज्य में विधानसभा चुनाव करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। राजधानी में बिजली और महंगाई की मार से जनता त्रस्त है। जिसका सीधा लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।
नरेंद्र मोदी की एक समस्या यह है कि आम चुनाव उनके नाम पर लड़ा गया था। इस लिए आगामी महीनों में हरियाणाए महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी उनकी सरकार की लोकप्रियता दांव पर लगी होगी। अगले 15 दिनों में सरकार को रेल और आम बजट पेश करना है। वे कड़े फैसले लेने की बात कह चुके हैं। ऐसे में अगर अगले कुछ महीनों में महंगाई पर काबू नहीं पाया जाता है और आम आदमी को अच्छे दिनों का अहसास नहीं होता हैए तो वह अपने वोट के जरिए भाजपा को सबक सिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इस बार महंगाई का ठीकरा कांग्रेस पर नहीं बल्कि भाजपा की मोदी सरकार पर फूटेगा।
कई दिनों तक नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ रंगराजन कमेटी की सिफारिशें लागू करने के मुद्दे पर गहन चर्चा कीए पर वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके। अगर इसे मान लिया जाता हैए तो गैस की कीमत 4.2 डालर से बढ़ कर 8ण्8 डालर हो जाएगी। इससे बिजलीए यूरियाए सीएनजी और पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचने वाली गैस के दामों में तेजी बढ़ोतरी तय है। तमाम फार्मूलों पर विचार और चर्चा करने

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