akhilesh19बस पांच दिन बाद बिजली और रुलाएगी। बिना कोयले के पूरे प्रदेश में अंधकार होने जा रहा है। अभूतपूर्व विद्युत संकट को लेकर चौतरफा आलोचनाओं का शिकार उत्तर प्रदेश सरकार की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं है और अब कोयले की कमी के चलते राज्य सरकार के तीन ताप विद्युत संयंत्रों में उत्पादन ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सूत्रों के अनुसार अनपरा ए और अनपरा बी के अलावा परीछा ताप विद्युत गृह को अगर तत्काल कोयले की आपूर्ति नहीं की जाती है तो उसे बंद करना पड़ सकता है। इन तीन विद्युत केन्द्रों में केवल पांच दिन के लिए कोयला शेष बचा है। राज्य सरकार के अधीन इन तीन संयंत्रों की कु ल उत्पादन क्षमता 2670 मेगावाट है जिसमे अनपरा ए और बी की उत्पादन क्षमता 1530 मेगावाट और परीछा ताप संयत्र 1140 मेगावाट का है।
निगम के अध्यक्ष कामरान रिजवी ने बताया कि निगम ने केन्द्र को पत्र लिखकर विद्युत केन्द्रों की मौजूदा स्थिति से अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा, हमारे लिए निश्चित रूप से यह चिंता का सबब है। केन्द्र सरकार से हमें तत्काल पर्याप्त मात्रा में कोयला आपूर्ति का आश्वासन चाहिए। अनपरा ए और बी विद्युत केन्द्र को हर रोज कम से कम 27 हजार टन कोयला चाहिए होता है लेकिन पिछले करीब दस दिन से नेशनल कोल फील्ड्स लिमिटेड द्वारा इन विद्युत केन्द्रों को प्रतिदिन करीब 20 हजार टन के हिसाब से कोयला आपूर्ति की जा रही है। झांसी स्थित पारीछा ताप विद्युत संयंत्र में 110 मेगावाट, 210 मेगावाट और 250 मेगावाट की दो-दो इकाइयां कोयले की कमी से हर वक्त जुझती रहती हैं, जिससे 1140 मेगावाट की प्रतिष्ठापित क्षमता वाले इस बिजलीघर में उत्पादन 500 से 700 मेगावाट के आसपास रहता है। पारीछा विद्युत केन्द्र में आपूर्ति किये जा रहे कोयले की मात्रा और उसकी गुणवत्ता विद्युत प्रशासन के चिंता का कारण बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार पारीछा विद्युत केन्द्र को बहुत घटिया कोयले की आपूर्ति हो रही है जिसमें बहुत विशाल टुकडेÞ शामिल होते हैं। विद्युत केन्द्रों को कोयले को जलाने से पहले फिल्टर करने के साथ इन कोयले के विशाल खंडों को तुड़वाना पड़ता है। मानसून के समय में कोयले की आपूर्ति कम हो जाती है। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने केन्द्र से कम से कम 20 दिन के लिए कोयला देने की मांग की है। सूत्रों ने कहा कि बरसात में कोयला गीला हो जाता है।

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