डीजीपी के विवादित बयान व सीबीआई जांच में देरी पर नाराजगी
बदायूं बलात्कार-हत्याकांड मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के विवादित बयान और प्रकरण की सीबीआई जांच में हो रही अनावश्यक देर से नाराज पीडि़त परिजन ने आज धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उसहैत क्षेत्र के कटरा सआदतगंज गांव में गत 27 मई को हुई वारदात के दूसरे ही दिन से सीबीआई जांच की मांग कर रहे परिजन बेहद गुस्से में हैं और उनके साथ महिलाओं एवं बच्चों समेत करीब 100 लोग बाग के उसी पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए हैं जिस पर गत 28 मई को उनकी बेटियां फंदे से लटकी पाई गई थीं। सभी का कहना है कि जब तक मामले की सीबीआई जांच शुरू नहीं हो जाती तब तक वे धरने पर बैठे रहेंगे।
दरिंदगी का शिकार हुई लड़कियोंं में से एक के पिता ने कहा कि डीजीपी साहब कह रहे हैं कि घटना आनर किलिंग भी हो सकती है और सम्पत्ति का विवाद भी इसका कारण हो सकता है। वह मेरे परिवार पर तोहमत लगा रहे हैं। अगर हमने अपनी बेटियों को मारा, तो क्या डीजीपी साहब बलात्कार का आरोप भी हम पर ही लगाएंगे। मारी गई दूसरी लडक़ी के पिता ने कहा, डीजीपी साहब झूठ पकडऩे वाली मशीन का डर दिखा रहे हैं। देर किस बात की है, लाइए मशीन, हम कहीं भागे नहीं हैं। गौरतलब है कि प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ए. एल. बनर्जी ने बदायूं में हाल में हुए सामूहिक बलात्कार-हत्याकांड मामले को नया मोड़ देते हुए गत शनिवार को कहा था कि जांच में अभी तक मिले तथ्यों के मुताबिक वारदात की शिकार एक लडक़ी के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है और इस मामले के पीछे सम्पत्ति विवाद या आनर किलिंग होने का भी संदेह है।
पीडि़त के पिता ने आरोप लगाया, हमें तो पता था कि सरकार वही करेगी जो यहां की पुलिस कहेगी। सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है, तो स्थानीय पुलिस और एसआईटी इस मामले की जांच क्यों कर रही है। उसका मकसद यह है कि किस तरह सुबूतों को मिटाया जाए। मृत लड़कियों में से एक की मां ने कहा, अगर हमने ही अपनी बेटियों की हत्या की होती तो सीबीआई जांच की मांग क्यों करते। हमें तो पहले ही दिन से शक था कि अखिलेश यादव सरकार अपनी बिरादरी के आरोपियों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। डीजीपी का बयान भी इसी गंदी कोशिश का नतीजा है। पुलिस हम पर दबाव बना रही है और पूरे परिवार को धमकाया जा रहा है। डीजीपी ने पिछले शनिवार को लखनउू में संवाददाताओं से कहा था, दोनों लड़कियों में से एक अपने पिता की अकेली संतान थी। अगर यह लडक़ी जिंदा नहीं रहती, तो दूसरों को फायदा होता। हत्या का एक मकसद यह भी हो सकता है। मेरा इशारा लडक़ी के परिवार की तरफ भी है। उन्होंने दावा किया था कि मामले की विशेषज्ञों द्वारा जांच कराए जाने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। विशेषज्ञों द्वारा कराई गई जांच में वारदात में मारी गई एक लडक़ी के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। डीजीपी ने कहा था, हो सकता है कि अपराध किसी अन्य तरीके का हो। जिन लोगों की बात हो रही है, वे नहीं भी हो सकते हैं। वे छूट भी सकते हैं, लेकिन यह तफ्तीश पर निर्भर है। हमें नहीं लगता कि एक लडक़ी से बलात्कार हुआ है। दो पुलिसकर्मियों को तात्कालिक परिस्थितियों में बर्खास्त किया गया। अगर हमसे कहीं कोई गलती हुई है तो उसे ठीक किया जाएगा। डीजीपी ने बताया था कि प्रकरण के आरोपियों का नारको तथा लाई डिटेक्टर परीक्षण कराने का निर्णय किया गया है। गौरतलब है कि बदायूं जिले के कटरा सादतगंज क्षेत्र में गत 27 मई को शौच के लिए गई 14 तथा 15 साल की चचेरी बहनों के शव अगले दिन गांव के बाहर एक बाग में पेड़ पर लगे फंदों से लटकते पाए गए थे। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उनमें से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों लड़कियों को सामूहिक बलात्कार के बाद फांसी पर लटकाए जाने की पुष्टि हुई थी। राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

अगली सुनवाई कल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बदायूं जिले में हाल ही में दो किशोरियों की सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या के मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपे जाने की सिफारिश संबंधी अधिसूचना की प्रति आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनउू पीठ में पेश की। इस बीच, याचिकाकर्ता ने भी मृत लड़कियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत मामले की प्राथमिकी की प्रतियां न्यायालय में पेश कीं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 11 जून नियत की है। न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा और न्यायमूर्ति राजन रॉय की अवकाशकालीन खण्डपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तीन जून को इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने सम्बन्धी अधिसूचना की प्रति पेश की। इस बीच, याचिकाकर्ता वकील प्रिंस लेनिन ने इस मामले में दर्ज कराई गई रिपोर्ट समेत मृत किशोरियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतियां भी पेश कीं। अदालत ने गत तीन जून को राज्य सरकार की अपर महाधिवक्ता और याचिकाकर्ता को ये दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने यह निर्देश ‘वी द पीपुलÓ नामक संस्था के महासचिव प्रिंस लेनिन की लंबित जनहित याचिका पर दिए हैं। इसमें मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच करानेे, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देने समेत मृत लड़कियों के परिजन को समुचित सुरक्षा मुहैया कराए जाने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
गौरतलब है कि उसहैत थाना क्षेत्र के कटरा सादतगंज क्षेत्र में गत 27 मई की रात शौच के लिए गई 14 तथा 15 साल की चचेरी बहनों के शव अगले दिन सुबह एक बाग में पेड़ पर फांसी से लटकते पाए गए थे। इस मामले में दो पुलिसकर्मियों समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उनमें से पांच को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीडि़त परिजन को पूरी सुरक्षा तथा पांच-पांच लाख रुपए मुआवजे का एलान किया था, जिसे परिजन ने ठुकरा दिया था। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

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